उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर क्षेत्रीय दल उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने अपनी चुनावी तैयारियों का औपचारिक आगाज कर दिया है। पार्टी ने ‘संकल्प, नए उत्तराखंड का’ नाम से अपना नीतिगत एजेंडा जारी करते हुए प्रदेश की सभी 70 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। इस दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने एक मंच पर आकर संगठन की एकजुटता का प्रदर्शन किया और राज्य के विकास के लिए अपनी प्राथमिकताएं भी सामने रखीं।
कार्यक्रम में यूकेडी के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह, पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक काशी सिंह ऐरी सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। नेताओं ने कहा कि राज्य गठन के मूल उद्देश्यों को पूरा नहीं किया जा सका है और उत्तराखंड आज भी पलायन, बेरोजगारी, भूमि संरक्षण और मूल निवासियों के अधिकार जैसे गंभीर मुद्दों से जूझ रहा है। उनका कहना था कि पार्टी अब नए संकल्प के साथ उत्तराखंड को उसकी मूल भावना के अनुरूप आगे बढ़ाने के लिए जनता के बीच जाएगी।
यूकेडी ने अपने चुनावी एजेंडे में पांच प्रमुख प्राथमिकताएं तय की हैं। इनमें सबसे पहले उत्तराखंड के लिए अनुच्छेद 371 के तहत विशेष संवैधानिक प्रावधान की मांग शामिल है। पार्टी का कहना है कि इससे राज्य के लोगों, प्राकृतिक संसाधनों, सांस्कृतिक पहचान और राजनीतिक हितों को स्थायी संवैधानिक संरक्षण मिल सकेगा।
पार्टी ने मूल निवास व्यवस्था को कानूनी मान्यता देने की भी वकालत की है। यूकेडी का कहना है कि उत्तराखंड के मूल निवासियों को रोजगार, शिक्षा, भूमि और विकास के अवसरों में प्राथमिकता और उचित भागीदारी मिलनी चाहिए, ताकि राज्य के संसाधनों का लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंच सके।
भू-कानून को लेकर भी यूकेडी ने बड़ा वादा किया है। पार्टी ने कहा कि यदि उसे सत्ता मिलती है तो उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों और जरूरतों के अनुरूप एक मजबूत एवं राज्य-विशिष्ट भू-कानून लागू किया जाएगा। इसके साथ ही भूमि अधिकारों की सुरक्षा, चकबंदी को बढ़ावा और भूमि प्रशासन को आधुनिक बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
रोजगार और पलायन को भी पार्टी ने अपने एजेंडे का अहम हिस्सा बनाया है। यूकेडी का कहना है कि पर्वतीय जिलों में उद्योग, उद्यमिता, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं का विकास कर रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएंगे, जिससे युवाओं का पलायन रोका जा सके और लोग अपने गांवों में ही सम्मानजनक जीवन जी सकें।
इसके अलावा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण लाभों के न्यायसंगत वितरण की बात भी पार्टी ने कही है। यूकेडी का दावा है कि वर्तमान आरक्षण व्यवस्था में कोई बदलाव किए बिना यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इसका अधिकतम लाभ सबसे गरीब और वंचित परिवारों तक पहुंचे।
यूकेडी नेताओं ने कहा कि उत्तराखंड के मूल निवासियों ने पीढ़ियों तक जंगलों, जल स्रोतों, संस्कृति और हिमालयी पर्यावरण की रक्षा की है, लेकिन राज्य के विकास में उन्हें अपेक्षित हिस्सेदारी नहीं मिल सकी। उनका कहना है कि सीमित रोजगार, कमजोर कृषि व्यवस्था, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, मानव-वन्यजीव संघर्ष तथा लगातार बढ़ता पलायन आज उत्तराखंड की सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। पार्टी का दावा है कि उसका ‘संकल्प, नए उत्तराखंड का’ एजेंडा इन्हीं समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में तैयार किया गया है।













