हिंदू धर्मग्रंथ गरुड़ पुराण में जीवन, मृत्यु और पुनर्जन्म से जुड़े कई गूढ़ रहस्यों का वर्णन मिलता है। इस ग्रंथ में भगवान विष्णु द्वारा उनके वाहन गरुड़ को बताए गए उपदेश शामिल हैं, जिनमें मृत्यु से पहले मिलने वाले संकेतों का भी उल्लेख किया गया है। इन संकेतों को धार्मिक दृष्टिकोण से समझा जाता है और माना जाता है कि ये प्राकृतिक मृत्यु से पहले प्रकट होते हैं।
गरुड़ पुराण के अनुसार, जब किसी व्यक्ति की मृत्यु निकट होती है तो उसे अपने आसपास अदृश्य शक्तियों या आत्माओं का आभास होने लगता है। व्यक्ति को ऐसा महसूस हो सकता है कि कोई साया उसके पास से गुजरा है या आसपास मौजूद है। यह अनुभव उसे मानसिक रूप से विचलित भी कर सकता है।
एक अन्य संकेत के रूप में परछाई का धुंधला दिखाई देना बताया गया है। यदि किसी व्यक्ति को पानी, शीशे या तेल में अपनी छवि स्पष्ट नहीं दिखती, तो इसे मृत्यु के करीब होने का संकेत माना गया है। वहीं, यदि परछाई पूरी तरह गायब हो जाए तो यह अत्यंत निकट मृत्यु का संकेत माना गया है।
ग्रंथ में यह भी उल्लेख है कि मृत्यु से पहले व्यक्ति को अपनी ही नाक का अग्रभाग देखना बंद हो सकता है। सामान्यतः हम अपनी नाक का ऊपरी हिस्सा देख सकते हैं, लेकिन यदि कई प्रयासों के बाद भी यह दिखाई न दे तो इसे अशुभ संकेत माना गया है।
सपनों के माध्यम से भी संकेत मिलने की बात कही गई है। जैसे बार-बार बुझा हुआ दीपक दिखना, सूखे पेड़ नजर आना या काले कुत्ते का दिखाई देना—इन सबको मृत्यु के पूर्व संकेतों के रूप में देखा गया है।
इसके अलावा, शरीर के रंग में असामान्य परिवर्तन भी एक संकेत माना गया है। यदि किसी व्यक्ति का चेहरा या शरीर कभी अत्यधिक पीला, कभी काला या सफेद दिखाई देने लगे, तो इसे भी मृत्यु के निकट होने का संकेत बताया गया है।
गरुड़ पुराण के अनुसार, ऐसे संकेत मिलने पर व्यक्ति को सांसारिक मोह से हटकर ईश्वर की भक्ति, ध्यान और आत्मचिंतन की ओर अग्रसर होना चाहिए, ताकि वह मानसिक और आध्यात्मिक रूप से स्वयं को तैयार कर सके।
हालांकि, यह सभी बातें धार्मिक मान्यताओं और आस्था पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रमाणित नहीं माना जाता, इसलिए इन्हें विश्वास और परंपरा के संदर्भ में ही समझना उचित है।






