नई दिल्ली। देश में Census of India 2026 के पहले चरण की शुरुआत 1 अप्रैल 2026 से हो चुकी है, जो 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। इस बार की जनगणना में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां लिव-इन रिलेशन में रहने वाले कपल्स को लेकर विशेष प्रावधान किए गए हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, जनगणना के दौरान लिव-इन रिलेशन में रह रहे जोड़ों को अलग से चिन्हित किया जाएगा और उनसे वैवाहिक स्थिति से जुड़े अतिरिक्त सवाल पूछे जाएंगे। इसका उद्देश्य देश में तेजी से बदल रहे सामाजिक ढांचे और पारिवारिक व्यवस्था की सटीक जानकारी जुटाना है।
जनगणना अधिकारियों द्वारा ऐसे कपल्स से:
- साथ रहने की अवधि
- पारिवारिक संरचना
- बच्चों की स्थिति
- आर्थिक व्यवस्था
जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर जानकारी ली जाएगी। इससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लिव-इन संबंधों की वास्तविक स्थिति समझने में मदद मिलेगी।
जनगणना के पहले चरण, जिसे हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग एनुमरेशन कहा जाता है, में कुल 33 सवाल शामिल हैं। इनमें परिवार और रिश्तों से जुड़े प्रश्न प्रमुख हैं।
यदि कोई कपल अपने रिश्ते को स्थायी मानता है, तो उसे वैवाहिक श्रेणी में शामिल करते हुए शादीशुदा के रूप में दर्ज किया जा सकता है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था केवल सांख्यिकीय उद्देश्य से की जा रही है। इसका मतलब यह नहीं है कि लिव-इन में रहने वाले कपल्स को कानूनी रूप से पति-पत्नी के अधिकार मिल जाएंगे, जैसे संपत्ति, उत्तराधिकार या अन्य वैवाहिक लाभ।
Uttarakhand में यह प्रक्रिया पहले ही लागू की जा चुकी है। यहां स्वगणना के दौरान लिव-इन में रहने वाले कपल्स को विवाहित के रूप में दर्ज कराने की छूट दी गई है, खासकर तब जब उनका रिश्ता दीर्घकालिक हो या वे भविष्य में विवाह की योजना बना रहे हों।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत में बदलती सामाजिक संरचना को समझने की दिशा में अहम साबित होगा। इससे नीति निर्माण और सामाजिक योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।













