अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर चल रहे तनाव के बीच बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ईरान पर हमला करने का निर्णय उन्होंने अपनी मर्जी से लिया था, न कि इजरायल के कहने पर।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए कहा कि उनका यह फैसला दो प्रमुख कारणों से प्रेरित था—पहला, 7 अक्टूबर को इजरायल पर हुए हमास के हमले के बाद बने हालात, और दूसरा उनका यह पुराना रुख कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की जाती, तो ईरान परमाणु बम बनाने के बेहद करीब पहुंच सकता था। ट्रंप के अनुसार, यह कदम वैश्विक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्षी दलों और कई अमेरिकी मीडिया संस्थानों द्वारा उन पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि उन्होंने इजरायल के दबाव में आकर यह युद्ध शुरू किया। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप को इसके लिए राजी किया।
इन आरोपों को खारिज करते हुए ट्रंप ने कहा कि यह पूरी तरह उनका स्वतंत्र निर्णय था। उन्होंने “फेक न्यूज” पर भी निशाना साधते हुए कहा कि मीडिया का बड़ा हिस्सा भ्रामक जानकारी फैला रहा है।
ट्रंप ने अपने बयान में ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वहां के नेता समझदारी नहीं दिखाते, तो देश का हाल वेनेजुएला जैसा हो सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि ईरान नेतृत्व सही दिशा में फैसले लेता है, तो उसका भविष्य समृद्ध हो सकता है।
गौरतलब है कि ईरान लगातार अमेरिका पर आरोप लगाता रहा है कि वह इजरायल के हितों के लिए काम कर रहा है और अमेरिकी संसाधनों का इस्तेमाल ऐसे संघर्षों में किया जा रहा है, जिनका सीधा संबंध अमेरिका से नहीं है। ईरान ने कई बार अमेरिकी जनता से भी इस मुद्दे पर सवाल उठाने की अपील की है।
कुल मिलाकर, ट्रंप का यह बयान न केवल आरोपों का जवाब है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अमेरिका की स्थिति और उसकी रणनीति को लेकर एक स्पष्ट संदेश भी देता है।
















