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कुमाऊं में आंधी-तूफान का कहर: कई मकानों की छतें उड़ीं, पेड़ गिरने से जनजीवन प्रभावित, आज भी ऑरेंज अलर्ट

उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में मंगलवार को आए तेज आंधी-तूफान ने व्यापक तबाही मचाई। तेज हवाओं और बारिश के चलते कई इलाकों में मकानों की छतें उड़ गईं, पेड़ उखड़कर सड़कों पर गिर पड़े और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया।

उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की प्राथमिक रिपोर्ट के मुताबिक, बेरीनाग में 4 मकानों की छतें क्षतिग्रस्त हुईं, जबकि डीडीहाट में 8 मकानों को भारी नुकसान पहुंचा। धारचूला क्षेत्र में 3 मकानों और एक गौशाला को नुकसान हुआ है।

देवलथल में एक मकान के पास पेड़ गिरने से एक व्यक्ति घायल हो गया, जिसे स्थानीय स्तर पर उपचार दिया गया। जिन परिवारों के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, वे फिलहाल पड़ोसियों या रिश्तेदारों के यहां शरण लिए हुए हैं। प्रशासन प्रभावितों की निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर राहत सहायता देने की बात कही गई है।

बीते कई दिनों से उत्तराखंड खासकर कुमाऊं क्षेत्र भीषण गर्मी से जूझ रहा था। ऐसे में मौसम में अचानक बदलाव से लोगों को राहत तो मिली, लेकिन तेज आंधी-तूफान ने इस राहत को मुसीबत में बदल दिया।

तूफान के दौरान कई जगह पेड़ और बिजली के खंभे गिरने से सड़कें बाधित हो गईं और बिजली आपूर्ति भी ठप हो गई। ग्रामीण क्षेत्रों में इसका असर ज्यादा देखने को मिला। प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें सड़कों को खोलने और बिजली बहाल करने में जुटी हैं।

मौसम विभाग ने बुधवार, 29 अप्रैल को भी ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। नैनीताल, देहरादून, टिहरी गढ़वाल, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ समेत कई पर्वतीय जिलों में तेज बारिश, गरज-चमक और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है।
वहीं हरिद्वार और उधम सिंह नगर में बारिश का अलर्ट नहीं है, लेकिन तेज हवाएं और बिजली गिरने का खतरा बना हुआ है।

प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी इलाकों में मौसम का अचानक बदलना आम बात है, लेकिन कई बार यह खतरनाक रूप ले सकता है।
फिलहाल, प्रभावित क्षेत्रों में राहत और मरम्मत का काम जारी है और हालात सामान्य करने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं।