गन्ने से कैसे बनता है एथेनॉल? जानिए पूरा प्रोसेस और किसानों को होने वाला फायदा

उत्तराखंड डेली न्यूज ब्यूरो। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच इन दिनों एथेनॉल चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा दिए जाने से न केवल देश की ईंधन आयात निर्भरता कम हो रही है, बल्कि गन्ना किसानों के लिए भी आय के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

एथेनॉल एक प्रकार का बायोफ्यूल (जैव ईंधन) है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने के रस, शीरे (मोलासेस) तथा अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। पेट्रोल में इसके मिश्रण से पर्यावरण प्रदूषण कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में मदद मिलती है।

गन्ने से एथेनॉल बनाने की प्रक्रिया

गन्ने से एथेनॉल उत्पादन का कार्य चीनी मिलों और डिस्टिलरी में बड़े पैमाने पर किया जाता है। इसकी प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है।

1. गन्ने से रस निकालना

सबसे पहले खेतों से गन्ने की कटाई कर उसे चीनी मिलों में लाया जाता है। यहां आधुनिक मशीनों की सहायता से गन्ने का रस निकाला जाता है और बड़े-बड़े टैंकों में संग्रहित किया जाता है।

2. फर्मेंटेशन (किण्वन) प्रक्रिया

एथेनॉल निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण चरण फर्मेंटेशन होता है। इस प्रक्रिया में गन्ने के रस में विशेष प्रकार का यीस्ट (खमीर) मिलाया जाता है। यीस्ट रस में मौजूद प्राकृतिक शर्करा को रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से अल्कोहल में परिवर्तित कर देता है। इस प्रक्रिया में कुछ समय लगता है और परिणामस्वरूप अल्कोहल युक्त तरल पदार्थ तैयार होता है।

3. डिस्टिलेशन (आसवन)

फर्मेंटेशन के बाद तैयार अल्कोहल मिश्रण को डिस्टिलेशन यूनिट में भेजा जाता है। यहां गर्म करके अल्कोहल को अलग किया जाता है और उसकी शुद्धता बढ़ाई जाती है।

4. डीहाइड्रेशन (जल निष्कासन)

डिस्टिलेशन के बाद एथेनॉल में मौजूद पानी को विशेष तकनीक से अलग किया जाता है, जिससे उच्च गुणवत्ता वाला फ्यूल ग्रेड एथेनॉल तैयार होता है।

5. पेट्रोल में मिश्रण

तैयार एथेनॉल को तेल कंपनियों तक पहुंचाया जाता है, जहां इसे निर्धारित अनुपात में पेट्रोल के साथ मिलाकर बाजार में उपलब्ध कराया जाता है।

किसानों को कैसे होता है फायदा?

एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से गन्ने की मांग में वृद्धि होती है, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा चीनी मिलों को भी अतिरिक्त आय का स्रोत मिलता है, जिससे किसानों का भुगतान समय पर होने में मदद मिलती है।

पर्यावरण के लिए भी लाभदायक

विशेषज्ञों के अनुसार एथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटती है। यही कारण है कि भारत सरकार एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा रही है।

एथेनॉल न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर रहा है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।