रुद्रप्रयाग बीजेपी में बगावत के सुर, कई पदाधिकारियों ने दिया इस्तीफा, संगठन में मचा हड़कंप

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 से पहले रुद्रप्रयाग जिले में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के भीतर संगठनात्मक असंतोष खुलकर सामने आ गया है। अगस्त्यमुनि ग्रामीण मंडल के कई प्रमुख पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने अपने पदों से इस्तीफा देकर पार्टी संगठन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

इस्तीफा देने वालों में मंडल महामंत्री, उपाध्यक्ष, मंत्री, सोशल मीडिया संयोजक समेत कई पदाधिकारी शामिल हैं। सभी ने अपने इस्तीफे बीजेपी जिलाध्यक्ष भारत भूषण भट्ट को भेजे हैं। इस्तीफों के सार्वजनिक होने के बाद संगठन में हड़कंप मच गया है और राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

बताया जा रहा है कि हाल ही में आयोजित सोमनाथ भ्रमण कार्यक्रम को लेकर भी संगठन के भीतर नाराजगी थी। इसके साथ ही इस्तीफों की प्रतियां सोशल मीडिया पर वायरल होने से मामला और गर्मा गया है। पार्टी नेतृत्व अब डैमेज कंट्रोल में जुट गया है।

इस्तीफा देने वाले पदाधिकारियों ने मंडल अध्यक्ष पर उपेक्षा, पक्षपात और संगठन की गतिविधियों से जानबूझकर दूर रखने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्हें बैठकों, कार्यक्रमों और महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी तक नहीं दी जाती थी।

बीजेपी कार्यकर्ता योगेश सेमवाल ने भी आरोप लगाया कि उन्हें लगातार संगठन में नजरअंदाज किया गया। वहीं सोशल मीडिया संयोजक विनोद कुमार का कहना है कि उन्हें पार्टी के किसी भी कार्यक्रम या बैठक की सूचना तक नहीं दी जाती थी।

मंडल महामंत्री अजय जोशी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि कार्यकर्ताओं की भूमिका केवल झंडे-डंडे उठाने तक सीमित कर दी जाएगी और समर्पित कार्यकर्ताओं को सम्मान नहीं मिलेगा, तो ऐसे माहौल में काम करना मुश्किल है। इस्तीफा देने वाले नेताओं ने जिला नेतृत्व से पूरे मामले में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।

उधर, कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर बीजेपी को घेरा है। कांग्रेस का आरोप है कि पार्टी नेतृत्व अब इस पूरे मामले पर लीपापोती करने या इस्तीफों को फर्जी बताने की कोशिश कर सकता है।

हालांकि, जिन आरोपों को लेकर इस्तीफे दिए गए हैं, उन पर अगस्त्यमुनि ग्रामीण मंडल अध्यक्ष की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

रुद्रप्रयाग बीजेपी में सामने आया यह संगठनात्मक विवाद विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की अंदरूनी खींचतान को उजागर करता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व नाराज नेताओं को मनाने में सफल होता है या यह विवाद आगे और गहराता है।