टेट्रा पैक में शराब बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, याचिका निस्तारित

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की आबकारी नीति से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसी कोई स्पष्ट अनुमति मौजूद नहीं है, जिससे यह साबित हो कि टेट्रा पैक में शराब बिक्री की इजाजत दी गई है।

यह मामला एक जनहित याचिका (PIL) के जरिए अदालत के सामने आया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि राज्य की नीति के तहत छोटे टेट्रा पैक में शराब की बिक्री की अनुमति दी गई है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि इस तरह की पैकेजिंग से बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और वे इसे सामान्य पेय पदार्थ समझ सकते हैं।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जो व्यक्ति शराब खरीदना चाहता है, वह किसी भी रूप में खरीद सकता है। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि क्या ऐसी बिक्री के कारण किसी शहर में स्कूलों या शैक्षणिक संस्थानों में कोई ठोस समस्या सामने आई है।

अपने आदेश में अदालत ने कहा कि उसके समक्ष प्रस्तुत रिकॉर्ड में ऐसी कोई स्पष्ट नीति नहीं दिखाई गई, जिसमें टेट्रा पैक में शराब बिक्री की अनुमति का उल्लेख हो। हालांकि, 4 फरवरी को एक प्रशासनिक निर्णय के तहत छोटे पैक में शराब की अनुमति दिए जाने की बात सामने आई, लेकिन संबंधित नीति दस्तावेज अदालत के सामने प्रस्तुत नहीं किया गया।

अदालत ने याचिका का निस्तारण करते हुए याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी कि वह अपनी शिकायत संबंधित प्राधिकरण के समक्ष रखे। साथ ही, संबंधित अधिकारियों को मामले की जांच कर उचित निर्णय लेने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इस फैसले के साथ सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि फिलहाल उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर किसी ठोस नीति की पुष्टि नहीं होती, लेकिन मामले की जांच के लिए प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है।