अनुशासन सर्वोपरि: संगठन हित में UKD का बड़ा निर्णय

देहरादून। उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) के केंद्रीय नेतृत्व ने संगठनात्मक अनुशासन को सर्वोच्च मानते हुए पार्टी की मर्यादा के उल्लंघन के मामले में कड़ा निर्णय लिया है। केंद्रीय कार्यालय से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि दल के सिद्धांत, संगठन और कार्यकर्ताओं का सम्मान किसी भी व्यक्ति या पद से ऊपर है।

केंद्रीय अध्यक्ष श्री सुरेंद्र कुकरेती ने कहा कि जब व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा और अहंकार संगठन के हितों पर हावी होने लगते हैं, तब नेतृत्व का दायित्व केवल निर्णय लेना नहीं, बल्कि संगठन की गरिमा और मूल्यों की रक्षा करना भी होता है। उन्होंने कहा कि अनुशासन ही किसी भी मजबूत संगठन की आधारशिला है और उसी के बल पर जनता का विश्वास कायम रहता है।

पार्टी ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि उत्तराखंड क्रांति दल किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि राज्य आंदोलन के शहीदों के बलिदान, वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन और हजारों समर्पित कार्यकर्ताओं के वर्षों के संघर्ष, त्याग और समर्पण की अमूल्य विरासत है। इसलिए संगठन की मर्यादा को चुनौती देने वाले किसी भी आचरण के विरुद्ध निष्पक्ष एवं कठोर कार्रवाई करना नेतृत्व का कर्तव्य और उत्तरदायित्व है।

UKD ने दोहराया कि उसका मूल उद्देश्य देवभूमि उत्तराखंड के जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और युवाओं के अधिकारों की रक्षा करना है। पार्टी ने कहा कि वह व्यक्तिगत स्वार्थ, पद की लालसा और गुटबाजी से ऊपर उठकर जनहित, संगठन और उत्तराखंड के उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर संघर्ष करती रहेगी।

केंद्रीय नेतृत्व ने सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से संगठनात्मक अनुशासन, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामूहिक नेतृत्व की भावना को सर्वोच्च रखने का आह्वान करते हुए कहा कि—

“पार्टी से बड़ा कोई नहीं—न व्यक्ति, न पद।
संगठन की एकता, अनुशासन और सिद्धांत ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति हैं।”