वॉशिंगटन: भारत अपने परमाणु हथियारों के जखीरे को लगातार आधुनिक बनाने में जुटा है। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स (FAS) की नई रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत के पास करीब 190 परमाणु वॉरहेड हो सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इनमें नई मिसाइल प्रणालियों के लिए तैयार किए जा रहे लगभग 30 अतिरिक्त वॉरहेड भी शामिल हैं।
FAS ने यह आकलन ओपन-सोर्स जानकारी, सरकारी आंकड़ों और कमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण के आधार पर किया है।
भारत के 9 परमाणु क्षमता वाले सिस्टम ऑपरेशनल
रिपोर्ट के अनुसार भारत के पास फिलहाल 9 परमाणु क्षमता वाले सिस्टम ऑपरेशनल हैं। इनमें दो विमान, जमीन से दागी जाने वाली छह बैलिस्टिक मिसाइलें और समुद्र से दागी जाने वाली एक बैलिस्टिक मिसाइल शामिल है। इसके अलावा कम से कम दो अन्य परमाणु क्षमता वाले सिस्टम लगभग तैयार बताए गए हैं।
FAS न्यूक्लियर इंफॉर्मेशन प्रोजेक्ट के निदेशक हैंस क्रिस्टेंसन के अनुसार, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर अनुमान है कि भारत ने लगभग 190 परमाणु वॉरहेड तैयार किए होंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें 160 से अधिक वॉरहेड मौजूदा लॉन्चर प्रणालियों के लिए हो सकते हैं, जबकि कुछ अतिरिक्त वॉरहेड नई मिसाइल प्रणालियों के लिए रखे गए हैं।
सैन्य प्लूटोनियम का भी लगाया गया अनुमान
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत ने 140 से 225 परमाणु हथियारों के लिए पर्याप्त सैन्य प्लूटोनियम का उत्पादन किया हो सकता है। हालांकि, FAS का कहना है कि भारत ने अपने पूरे प्लूटोनियम भंडार का इस्तेमाल हथियार बनाने में किया हो, इसकी संभावना कम है। कुछ मात्रा रिजर्व के तौर पर रखे जाने की संभावना भी जताई गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत के परमाणु जखीरे का आकार इस बात पर भी निर्भर करता है कि उसके पास कितने और किस तरह के लॉन्चर मौजूद हैं। आम तौर पर किसी देश के लिए अपनी मौजूदा लॉन्चिंग क्षमता से कहीं अधिक परमाणु हथियार तैयार करने की संभावना कम होती है।
नई हथियार प्रणालियों पर भी काम जारी
FAS के अनुसार भारत हाल के वर्षों में कई नई परमाणु हथियार प्रणालियों को तैनात कर चुका है, जबकि कुछ अन्य प्रणालियां अभी विकास के चरण में हैं। इनका उद्देश्य मौजूदा परमाणु-सक्षम विमानों, जमीन से दागी जाने वाली मिसाइलों और समुद्र आधारित प्रणालियों को मजबूत करना या उनकी जगह नई तकनीक लाना है।
नई प्रणालियों के विकास के साथ आने वाले वर्षों में भारत के परमाणु हथियारों के जखीरे में और बढ़ोतरी की संभावना भी रिपोर्ट में जताई गई है।
पहले इस्तेमाल न करने की नीति पर भारत कायम
परमाणु हथियारों को लेकर भारत की घोषित नीति ‘नो फर्स्ट यूज’ (पहले इस्तेमाल न करने) की रही है। भारत सरकार ने संसद में भी कहा है कि वह विश्वसनीय न्यूनतम परमाणु प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने और परमाणु हथियारों के पहले इस्तेमाल न करने की नीति के प्रति प्रतिबद्ध है।
गौरतलब है कि परमाणु हथियारों के वैश्विक भंडार को लेकर SIPRI समेत विभिन्न संस्थाएं समय-समय पर आंकड़े जारी करती रही हैं। FAS की यह रिपोर्ट भी दुनिया के प्रमुख परमाणु-संपन्न देशों के हथियार भंडार और उनकी सैन्य क्षमताओं पर नजर रखने वाले आकलनों का हिस्सा है।













