दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के बहुचर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, अनस और जावेद को हत्या, अपहरण, दंगा फैलाने और सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने सहित विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
अदालत ने ताहिर हुसैन पर पांच लाख रुपये तथा अन्य चार दोषियों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की राशि में से पांच लाख रुपये मृतक अंकित शर्मा के परिजनों को मुआवजे के रूप में दिए जाएंगे। सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने इस मामले को “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” बताते हुए दोषियों के लिए फांसी की सजा की मांग की थी। अभियोजन का तर्क था कि अंकित शर्मा की बेहद नृशंस तरीके से हत्या की गई थी और उनके शरीर पर 51 गंभीर चोटों के निशान मिले थे।
हालांकि अदालत ने कहा कि हत्या अत्यंत क्रूर और अमानवीय थी, लेकिन अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि दोषियों के सुधार की कोई संभावना नहीं है। कोर्ट ने यह भी माना कि हत्या में किसी एक आरोपी की अलग और निर्णायक भूमिका स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं हो सकी। इसी आधार पर अदालत ने मृत्युदंड देने से इनकार करते हुए सभी दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
मामले के अनुसार, 25 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा के दौरान आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा अपने चांद बाग स्थित घर से इलाके की स्थिति का जायजा लेने निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। अगले दिन उनका शव खजूरी खास इलाके के एक नाले से बरामद हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर धारदार और कुंद हथियारों से किए गए 51 घाव मिलने की पुष्टि हुई, जिसने हत्या की बर्बरता को उजागर किया।
जांच के दौरान पुलिस ने दावा किया कि ताहिर हुसैन ने अपनी बहुमंजिला इमारत की छत को हिंसक भीड़ के संचालन का केंद्र बना रखा था। छत से पेट्रोल बम, एसिड पाउच, बड़े पत्थर और देसी गुलेल बरामद किए गए। कई प्रत्यक्षदर्शियों ने अदालत में गवाही दी कि ताहिर हुसैन छत से भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे और पत्थरबाजी सहित हिंसक गतिविधियों का निर्देश दे रहे थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, भीड़ ने अंकित शर्मा को पकड़कर ताहिर हुसैन के घर के पास ले जाकर जानलेवा हमला किया और बाद में शव को नाले में फेंक दिया।
फोरेंसिक रिपोर्ट, गवाहों के बयान, जब्त किए गए साक्ष्य तथा कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और सेल टावर लोकेशन जैसे तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने अभियोजन पक्ष की दलीलों को स्वीकार करते हुए सभी पांच आरोपियों को दोषी माना और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। यह फैसला 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक में न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।














