नई दिल्ली: लोकसभा ने पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। विधेयक पारित होने के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इसे प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।
प्रह्लाद जोशी ने कहा कि यह कानून प्रतियोगी परीक्षाओं की पवित्रता की रक्षा करेगा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्षता तथा विश्वसनीयता को मजबूत बनाएगा। उनके अनुसार, नए कानून में पेपर लीक और परीक्षा में धांधली करने वालों के खिलाफ कड़ी सजा, फास्ट-ट्रैक अदालतों, सशक्त जांच तंत्र और सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य पेपर लीक के पूरे नेटवर्क पर प्रभावी रोक लगाना और करोड़ों युवाओं की मेहनत एवं सपनों की सुरक्षा करना है।
विधेयक पारित होने पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी सोशल मीडिया पर छात्रों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह कानून सार्वजनिक परीक्षाओं की पवित्रता को नुकसान पहुंचाने वालों के लिए कड़े दंड का प्रावधान करता है और मोदी सरकार छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
लोकसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि नए कानून के लागू होने के बाद पेपर लीक से जुड़े मामलों का निपटारा पांच महीने के भीतर करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि हालिया पेपर लीक मामले की जानकारी मिलते ही जांच Central Bureau of Investigation> (CBI) को सौंप दी गई। उनके अनुसार, मामले में कई लोगों को हिरासत में लिया गया, दर्जनों स्थानों पर छापेमारी की गई, चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और मुकदमे की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
इससे पहले लोकसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी अपनी बात रखी। चर्चा के दौरान सदन में हंगामा हुआ, जिसके बाद सरकार की ओर से विधेयक के प्रावधानों का बचाव करते हुए कहा गया कि नया कानून परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।














