वॉशिंगटन: अमेरिका के वॉशिंगटन राज्य में कनाडा सीमा के पास एक बड़ा विमान हादसा उस समय टल गया, जब एक DHC-3 Otter सीप्लेन पानी पर उतरने की कोशिश के दौरान चट्टानों से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे के बाद विमान में भीषण आग लग गई, लेकिन स्थानीय नाविकों और अमेरिकी तटरक्षक बल (US Coast Guard) की त्वरित कार्रवाई से विमान में सवार सभी 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
सैन जुआन काउंटी शेरिफ कार्यालय के अनुसार, दुर्घटना गुरुवार शाम करीब 5:20 बजे सूसिया आइलैंड स्टेट पार्क के पास हुई। विमान में एक पायलट और 10 यात्री सवार थे। हादसे में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ है, जबकि कई यात्रियों के सिर और शरीर पर चोटें आई हैं। राहत की बात यह रही कि शुक्रवार तक कम से कम पांच घायलों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सीप्लेन पानी के बेहद करीब उड़ रहा था। उतरने की कोशिश के दौरान विमान एक ओर झुक गया और पहले केवल एक फ्लोट पानी से टकराया। इसके बाद विमान कुछ पल के लिए दोबारा हवा में उठा, लेकिन संतुलन खो बैठा और चट्टानों से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। टक्कर के तुरंत बाद विमान में आग लग गई और काला धुआं उठने लगा।
हादसे के समय आसपास कई नावें मौजूद थीं। प्रत्यक्षदर्शी डेव ईस्टमैन ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा कि विमान उनकी नाव से टकरा जाएगा, लेकिन वह द्वीप की ओर मुड़ गया। इसके बाद आसपास मौजूद छह से सात नावों ने बिना देर किए राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया। यात्रियों को जलते हुए विमान से सुरक्षित निकाल लिया गया, जिसके बाद अमेरिकी तटरक्षक बल ने भी मौके पर पहुंचकर अभियान संभाला।
हादसे के समय इलाके में मौसम अचानक खराब हो गया था। तेज बारिश, बिजली कड़कने और तूफानी परिस्थितियों की जानकारी सामने आई है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि खराब मौसम दुर्घटना का कारण बना या नहीं। जांच एजेंसियां सभी संभावित पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।
दुर्घटनाग्रस्त विमान DHC-3 Otter मॉडल का था, जिसे कनाडा की डी हैविलैंड एयरक्राफ्ट कंपनी ने बनाया है। इस विमान का संचालन केनमोर एयर कर रही थी। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेविड गुडजेल ने कहा कि जांच पूरी होने से पहले दुर्घटना के कारणों पर कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
अमेरिका की फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) और नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि सभी तकनीकी और मौसम संबंधी पहलुओं की जांच के बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।















