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ऑपरेशन सिंदूर भारत की स्मार्ट पावर का सबसे बड़ा उदाहरण: सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी

नई दिल्ली। Upendra Dwivedi ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत की “स्मार्ट पावर” का बेहतरीन उदाहरण बताते हुए कहा है कि भारत अब यह भली-भांति जानता है कि किस समय कौन-सी शक्ति का कितना इस्तेमाल करना है। उनके अनुसार यह केवल एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि सैन्य सटीकता, सूचना नियंत्रण, कूटनीतिक संदेश और आर्थिक दृढ़ता का संयुक्त राष्ट्रीय प्रदर्शन था।

सेना प्रमुख ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत दुश्मन की आतंकी संरचनाओं को गहराई तक जाकर ध्वस्त किया गया। इस अभियान ने वर्षों से चली आ रही रणनीतिक सोच को तोड़ा और 88 घंटे बाद इसे पूरी रणनीति और सोच-समझ के साथ रोका गया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन ने दुनिया को दिखा दिया कि भारत सैन्य कार्रवाई को रणनीतिक सफलता में बदलना जानता है।

Upendra Dwivedi ने वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है। उन्होंने कहा, “वैश्विक स्तर पर अव्यवस्था, अविश्वास और बदलते गठबंधन नई चुनौतियां पैदा कर रहे हैं। कभी माना जाता था कि व्यापार, सप्लाई चेन और डिजिटल कनेक्टिविटी दुनिया को संघर्ष से दूर ले जाएंगे, लेकिन अब यही साधन दबाव और रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल हो रहे हैं।”

आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप पर बात करते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि पहले नई तकनीकों को युद्ध क्षेत्र तक पहुंचने में दशकों लग जाते थे, लेकिन अब यह प्रक्रिया कुछ महीनों में पूरी हो रही है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, ऑटोनॉमस सिस्टम, स्पेस और एडवांस्ड मटेरियल्स को भविष्य के युद्ध की दिशा तय करने वाला बताया।

उन्होंने कहा कि भारत को केवल नई तकनीकों को अपनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें स्वदेशी बनाकर वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ना होगा। सेना प्रमुख ने आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य बताते हुए कहा कि विदेशी सप्लाई चेन, क्रिटिकल मिनरल्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर अत्यधिक निर्भरता आज की सबसे बड़ी रणनीतिक कमजोरियों में शामिल है।

उन्होंने कहा, “आत्मनिर्भरता अब केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्यता बन चुकी है। आधुनिक संघर्ष केवल सेना पर दबाव नहीं डालते, बल्कि उद्योग, रिसर्च और प्रशासनिक ढांचे को भी प्रभावित करते हैं। इसलिए भारत को ऐसी रक्षा औद्योगिक क्षमता विकसित करनी होगी जो आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भी हो।”

अपने संबोधन के अंत में सेना प्रमुख ने पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee के शब्दों को उद्धृत करते हुए कहा, “शांति, शक्ति की अनुपस्थिति नहीं है। शांति, क्षमता, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प की उपस्थिति है।”