नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सोमवार को संसद में बताया कि देश में पिछले पांच वर्षों के दौरान कुल 23 विमान और हेलीकॉप्टर हादसे दर्ज किए गए हैं। यह जानकारी नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से दी।
मंत्री द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न वर्षों में हादसों की संख्या में उतार-चढ़ाव देखा गया। वर्ष 2021 में सबसे अधिक 6 हादसे दर्ज किए गए, जबकि 2022 और 2023 में 4-4 घटनाएं सामने आईं। वहीं 2024 में यह संख्या घटकर 3 रह गई, जबकि 2025 में फिर से 6 हादसे दर्ज किए गए।
आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वर्ष हेलीकॉप्टर हादसों की दर प्रति 10,000 उड़ान घंटों में 0.53 रही, जो बीते पांच वर्षों में सबसे अधिक है। इसके अलावा गैर-नियोजित स्थिर पंख वाले विमानों (नॉन-शेड्यूल्ड फिक्स्ड विंग ऑपरेटर) की दुर्घटना दर प्रति 10,000 प्रस्थान में 0.27 दर्ज की गई।
2025 में कुल 6 हादसों में से 4 हेलीकॉप्टर से जुड़े थे, जबकि नियोजित (शेड्यूल्ड) और गैर-नियोजित स्थिर पंख वाले विमानों से जुड़े एक-एक हादसे सामने आए।
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय में मानव संसाधन की कमी को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि इसका सुरक्षा कार्यों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है। उन्होंने बताया कि स्वीकृत 1,630 पदों में से 780 से अधिक पद वर्तमान में खाली हैं।
भर्ती प्रक्रिया की जानकारी देते हुए मंत्री ने कहा कि हाल के महीनों में 167 उम्मीदवारों का चयन किया गया है, जिनमें से 106 को नियुक्ति पत्र जारी किए जा चुके हैं। इसके अलावा रिजर्व पैनल से 42 अधिकारियों की भर्ती के लिए संघ लोक सेवा आयोग से अनुरोध किया गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2026 के लिए विभिन्न तकनीकी कैडरों में 82 पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया जारी है। साथ ही, खाली पदों को अस्थायी संविदात्मक नियुक्तियों के जरिए भरा जा रहा है।
सरकार ने आश्वस्त किया कि देश में विमानन सुरक्षा के लिए एक व्यवस्थित निगरानी तंत्र मौजूद है और यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।














