अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित अनियमितताओं के मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) ने दूसरे दिन भी अपनी पड़ताल जारी रखी। मंगलवार को एसआईटी की टीम करीब सात घंटे तक मंदिर परिसर और ट्रस्ट कार्यालय में जांच करती रही तथा अब तक 100 से अधिक लोगों से पूछताछ कर चुकी है।
एसआईटी अध्यक्ष एवं लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ रेंज की आईजी किरण एस तथा वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन सहित अन्य अधिकारी सुबह मंदिर परिसर पहुंचे और ट्रस्ट कार्यालय में जांच शुरू की। टीम ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों, पुजारियों, बैंक अधिकारियों तथा दान प्रक्रिया से जुड़े अन्य लोगों से विस्तृत जानकारी ली।
दान प्रक्रिया की हो रही गहन जांच
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी मंदिर निर्माण के बाद से प्राप्त दान और चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया की जांच कर रही है। दान संग्रह, उसकी गणना, सुरक्षा व्यवस्था तथा संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। जांच के दौरान कई लोगों के बयान वीडियो रिकॉर्डिंग के माध्यम से दर्ज किए गए हैं।
आचार्य विनोद मिश्र का बड़ा दावा
इस बीच आचार्य विनोद मिश्र ने दावा किया है कि मंदिर निर्माण के बाद एक कारोबारी द्वारा भेंट किया गया करोड़ों रुपये मूल्य का हार और चरण पादुकाएं मंदिर में चढ़ाई ही नहीं गईं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चढ़ावे में प्राप्त आभूषणों को बेंगलुरु भेजकर गलाया जाता है और बाद में उनकी सोने की ईंटें बनाकर रखी जाती हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और जांच एजेंसियों ने भी इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
संतों ने जताई चिंता
राम जन्मभूमि मामले के पक्षकार महंत धर्मदास ने कहा कि ट्रस्ट का आधार विश्वास होता है और यदि उस पर सवाल उठने लगें तो यह गंभीर विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या के संतों और स्थानीय लोगों की उपेक्षा की गई है।
वहीं, जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने पूरे मामले को सनातन धर्म को बदनाम करने की साजिश बताते हुए राजनीतिक षड्यंत्र की आशंका जताई।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मामले को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार अपने चरम पर पहुंच गया है और पूरे प्रकरण की बहुसदस्यीय न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए, ताकि दोषियों की जवाबदेही तय हो सके।
एफआईआर की मांग
धर्म सेना, करणी सेना और युवा कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने थाना राम जन्मभूमि में अलग-अलग तहरीर देकर मामले में एफआईआर दर्ज करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। संगठनों का कहना है कि चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की खबरों से करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं।
पुराने मामले भी चर्चा में
दान पेटियों में कथित गड़बड़ी के मामले के बीच दो वर्ष पुराना एक मामला भी फिर चर्चा में आ गया है। सूत्रों के अनुसार, सावन झूला मेले के दौरान भगवान राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न को पहनाए जाने वाले सोने के मुकुटों के गायब होने की घटना को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
फिलहाल एसआईटी सभी पहलुओं की जांच कर रही है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।













