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दिल्ली–दून एक्सप्रेस-वे का खास आकर्षण: 12 किमी वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर

देहरादून/सहारनपुर। Delhi–Dehradun Expressway का पूरा मार्ग आधुनिक सुविधाओं से लैस है, लेकिन इसका 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर सबसे खास और आकर्षक हिस्सा बनकर उभरा है। यह कॉरिडोर न केवल यात्रियों को अनोखा अनुभव देता है, बल्कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए भी एक बेहतरीन उदाहरण है।

भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा इस कॉरिडोर को तीन हिस्सों में बांटा गया है:

  • गणेशपुर क्षेत्र
  • मोहंड क्षेत्र
  • आसारोडी से Dehradun तक

यह पूरा इलाका घने जंगलों और वन्यजीवों की आवाजाही के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

एक्सप्रेस-वे का अंतिम हिस्सा Rajaji National Park और शिवालिक वन क्षेत्र से होकर गुजरता है।
इस प्रोजेक्ट के लिए उत्तर प्रदेश और Uttarakhand में वन भूमि का सीमित हस्तांतरण किया गया, लेकिन डिजाइन ऐसा रखा गया कि प्रकृति और विकास के बीच संतुलन बना रहे।

✨ कॉरिडोर की प्रमुख खूबियां
🔹 वन्यजीवों के लिए सुरक्षित रास्ता
हाथी, नीलगाय, सांभर, तेंदुआ और जंगली सुअर जैसे जानवर अब बिना किसी बाधा के इस क्षेत्र से गुजर पा रहे हैं।
🔹 दुर्घटनाओं में कमी
पहले जहां सड़क दुर्घटनाओं में वन्यजीवों की जान का खतरा रहता था, अब इसमें काफी कमी आई है।
🔹 मानव विस्थापन नहीं
एलिवेटेड (ऊंचा) मार्ग होने के कारण इस परियोजना में किसी भी प्रकार का विस्थापन नहीं हुआ।
🔹 बेहतर पर्यावरण संतुलन

  • ध्वनि और वायु प्रदूषण को कम किया गया
  • जानवरों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखा गया

🔹 जीन पूल में सुधार
वन्यजीवों के मुक्त आवागमन से उनकी प्रजातियों की गुणवत्ता और संख्या में सुधार संभव होगा।
🔹 ईंधन और कार्बन उत्सर्जन में कमी

  • अगले 20 वर्षों में 2.44 मिलियन टन CO₂ उत्सर्जन कम होगा
  • यह लगभग 65 लाख पेड़ लगाने के बराबर है
  • करीब 19% ईंधन की बचत होगी

इस कॉरिडोर से गुजरते समय यात्रियों को हरियाली, जंगल और प्राकृतिक वातावरण का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है, जो सफर को और भी सुखद बना देता है।

दिल्ली–दून एक्सप्रेस-वे का यह वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर भारत में स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण संरक्षण का शानदार उदाहरण है। यह दिखाता है कि विकास और प्रकृति साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।