वायनाड भूस्खलन: फिर शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन, अब तक 7 शव बरामद

केरल के वायनाड जिले में 7 जुलाई को हुए भीषण भूस्खलन के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। रविवार को एक बार फिर खोज अभियान शुरू किया गया, जिसमें अब तक 7 शव बरामद किए जा चुके हैं। प्रशासन को आशंका है कि अभी भी कई लोग मलबे में दबे हो सकते हैं।

यह हादसा वायनाड के मेप्पाडी क्षेत्र में मीनाक्षी पुल के पास हुआ था। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण पहाड़ी का बड़ा हिस्सा अचानक खिसक गया, जिसकी चपेट में टनल निर्माण कार्य में लगे मजदूर आ गए। घटना के समय मजदूरों को दो बसों से कार्यस्थल पर लाया गया था। भूस्खलन के बाद बसें और श्रमिकों के कैंप भी प्रभावित हुए। कई लोगों ने भागकर अपनी जान बचाई, लेकिन कुछ मजदूर मलबे में दब गए। हादसे के तुरंत बाद राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया था, जिसमें शुरुआती दौर में तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी।

क्या होता है भूस्खलन?

भूस्खलन (Landslide) एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें पहाड़ी ढलानों की मिट्टी, चट्टानें, बजरी और मलबा गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से नीचे की ओर खिसक जाता है। यह घटना प्राकृतिक कारणों के साथ-साथ मानवीय गतिविधियों के कारण भी हो सकती है।

भूस्खलन के प्रमुख कारण

प्राकृतिक कारण

लगातार भारी बारिश या बादल फटना
बर्फ का तेजी से पिघलना
भूकंप
ज्वालामुखीय गतिविधियां
ढलानों का प्राकृतिक कटाव

मानवीय कारण

जंगलों की अंधाधुंध कटाई
अनियोजित निर्माण कार्य
पहाड़ी ढलानों पर अत्यधिक भार
खराब जल निकासी व्यवस्था
भूस्खलन रोकने के उपाय

विशेषज्ञों के अनुसार प्राकृतिक कारणों से होने वाले भूस्खलन को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन मानवीय कारणों को नियंत्रित कर जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए प्रभावी जल निकासी प्रणाली विकसित करना, रिटेनिंग वॉल का निर्माण, ढलानों का वैज्ञानिक तरीके से विकास (ग्रेडिंग और टेरेसिंग), शॉटक्रीट और सुरक्षा जाल (नेटिंग) का उपयोग, बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण तथा वन संरक्षण जैसे उपाय महत्वपूर्ण हैं।

प्रशासन की टीमें फिलहाल प्रभावित क्षेत्र में राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं और मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी है।