राम मंदिर चंदा चोरी मामला: एसओपी में थे सख्त नियम, लेकिन कई स्तर पर हुई अनदेखी

श्री राम जन्मभूमि मंदिर में कथित चंदा चोरी मामले की जांच के दौरान कई अहम खुलासे हुए हैं। पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों में से तीन—लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और करुणेश पांडेय—को 40 घंटे की रिमांड पर लेकर पूछताछ की। जांच में आरोपियों के पास से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पुरानी फर्जी रसीद बुक बरामद हुई, जो असली रसीद जैसी दिखाई देती थी। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे फर्जी रसीदें काटकर श्रद्धालुओं से चंदा वसूलते थे।

जांच में यह भी सामने आया कि दान की गणना और जमा प्रक्रिया के लिए वर्ष 2025 में बनाई गई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का कई मामलों में पालन नहीं किया गया।

एसओपी में क्या-क्या प्रावधान थे?

बैंक और ट्रस्ट की संयुक्त जिम्मेदारियां

दानपात्र को प्रतिदिन नामित अधिकारियों की संयुक्त मौजूदगी में खोला जाए।
पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड और निगरानी सुनिश्चित की जाए।
गिनती कक्ष का संचालन तय नियमों के अनुसार किया जाए।
दान की राशि नियमित अंतराल पर बैंक खाते में जमा कराई जाए।
नोट गिनने वाली मशीनों की नियमित जांच और सही संचालन सुनिश्चित किया जाए।
एसबीआई अधिकारियों का मासिक रोटेशन किया जाए।

ट्रस्ट की जिम्मेदारियां

दान गणना प्रक्रिया की निगरानी कर पारदर्शिता बनाए रखना।
नकद जमा पर्ची, चालान और रजिस्टर सहित सभी दस्तावेजों का सत्यापन और हस्ताक्षर।
कर्मचारियों के लिए उचित कार्य वातावरण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना।

सुरक्षा संबंधी नियम

गिनती कक्ष में बिना वर्दी और सोना-चांदी जैसी कीमती वस्तुएं पहनकर प्रवेश की अनुमति नहीं।
प्रवेश और निकास के समय सुरक्षा जांच अनिवार्य।
आगंतुक रजिस्टर का नियमित और सही रखरखाव।

दान गणना की प्रक्रिया

दानपात्र से निकली राशि को अलग-अलग बॉक्स में सुरक्षित रखकर समय पर गिना जाए।
सभी बॉक्स और बोरों की क्रमवार गिनती कर राशि का मिलान किया जाए।
दान में मिली वस्तुओं का अलग रिकॉर्ड तैयार कर सुरक्षित लॉकर में रखा जाए।
फटे या खराब नोट अलग रखे जाएं।
सिक्कों की गिनती मशीनों से कराई जाए।

अन्य निर्देश

गिनती कक्ष में भोजन ले जाना प्रतिबंधित।
भोजन और नाश्ता कक्ष के बाहर किया जाए।
धूम्रपान, गुटखा, तंबाकू, बीड़ी और सिगरेट पर पूरी तरह प्रतिबंध रहे।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि एसओपी के किन-किन प्रावधानों की अनदेखी हुई और इससे कथित गड़बड़ी को अंजाम देने में किस तरह मदद मिली। मामले की जांच अभी जारी है।