पाकिस्तान में शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। पाकिस्तान के शिक्षा मंत्रालय की ‘Girls’ Education Statistics and Trends Report 2023-24’ के अनुसार देश में लगभग 2.62 करोड़ बच्चे स्कूल से बाहर हैं, जिनमें करीब 1.34 करोड़ लड़कियां शामिल हैं।
रिपोर्ट का विमोचन पाकिस्तान के शिक्षा मंत्री खालिद मकबूल सिद्दीकी ने किया। उन्होंने स्वीकार किया कि विभिन्न प्रयासों के बावजूद शिक्षा क्षेत्र में चुनौतियां बरकरार हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षा पर राष्ट्रीय बजट का हिस्सा 13 प्रतिशत से घटकर 11 प्रतिशत रह गया है। अधिकतर प्रांतों—खासकर पंजाब और सिंध—में शिक्षा बजट में कमी आई है, जबकि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में यह स्थिर बताया गया है।
चिंता की बात यह है कि शिक्षा के लिए आवंटित बजट का लगभग 94 प्रतिशत हिस्सा वेतन भुगतान में ही खर्च हो जाता है, जिससे नए प्रोजेक्ट्स और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बहुत कम संसाधन बचते हैं।
हालांकि रिपोर्ट में कुछ राहत भरे आंकड़े भी सामने आए हैं। लड़कियों की प्राइमरी स्कूल पूरी करने की दर 75 प्रतिशत से बढ़कर 89 प्रतिशत हो गई है। इसके अलावा—
- 96 प्रतिशत स्कूल पक्की इमारतों में संचालित हो रहे हैं।
- 92 प्रतिशत स्कूलों में कार्यरत शौचालय उपलब्ध हैं।
- 82 प्रतिशत स्कूलों में साफ पेयजल की सुविधा है।
उच्च शिक्षा संस्थानों में लड़के-लड़कियों का नामांकन लगभग बराबर है, लेकिन महिलाओं की लेबर फोर्स में भागीदारी मात्र 24 प्रतिशत है। शिक्षा मंत्री सिद्दीकी ने इसे “ह्यूमन रिसोर्स की बर्बादी” बताया और कहा कि कक्षा से पेशेवर दुनिया तक पहुंचने में महिलाओं को कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
राज्य मंत्री वजीहा कमर ने बताया कि इन कमियों को दूर करने के लिए नया एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान जैसे युवा आबादी वाले देश के लिए शिक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ाना और संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है, ताकि 14 करोड़ युवाओं को बोझ नहीं बल्कि रणनीतिक संपत्ति के रूप में विकसित किया जा सके।















