रुद्रप्रयाग। पंचकेदारों में द्वितीय केदार Madmaheshwar Temple की चल विग्रह उत्सव डोली मंगलवार को शीतकालीन गद्दीस्थल Omkareshwar Temple से विधि-विधान, वैदिक मंत्रोच्चारण और धार्मिक परंपराओं के साथ कैलाश के लिए रवाना हो गई। डोली प्रस्थान के साथ ही मद्महेश्वर घाटी एक बार फिर भक्तिमय माहौल में डूब गई है और यात्रा पड़ावों पर रौनक लौट आई है।
सुबह से ही ओंकारेश्वर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। “हर-हर महादेव” और “जय बाबा मद्महेश्वर” के जयघोषों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। पारंपरिक वाद्ययंत्रों, फूलों से सजी डोली और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच भगवान मद्महेश्वर की डोली ने कैलाश के लिए प्रस्थान किया। डोली यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, स्थानीय ग्रामीण, हक-हकूकधारी और विभिन्न राज्यों से पहुंचे भक्त शामिल हुए।
यात्रा मार्ग पर जगह-जगह श्रद्धालुओं ने डोली का स्वागत किया। बाबा के जयकारों से पूरी घाटी शिवमय नजर आई। Badrinath-Kedarnath Temple Committee (बीकेटीसी) के उपाध्यक्ष विजय कपरवान ने बताया कि भगवान मद्महेश्वर की डोली प्रथम रात्रि प्रवास के लिए राकेश्वरी मंदिर रासी पहुंचेगी। इसके बाद बुधवार को डोली गौण्डार गांव में अंतिम रात्रि प्रवास करेगी और 21 मई को वैदिक परंपराओं के अनुसार मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे।
यात्रा शुरू होने के साथ ही मनसूना, राउलैक, उनियाणा, रासी, गौण्डार और बंतोली समेत विभिन्न पड़ावों पर यात्रियों की आवाजाही बढ़ गई है। इससे स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों में भी तेजी देखने को मिल रही है। होटल व्यवसायी, घोड़ा-खच्चर संचालक, दुकानदार और स्थानीय व्यापारी यात्रा सीजन को लेकर काफी उत्साहित हैं।
Madmaheshwar Temple यात्रा को क्षेत्र की आर्थिकी की जीवनरेखा माना जाता है। यात्रा प्रारंभ होने से घाटी में एक बार फिर रौनक लौट आई है और स्थानीय लोगों के चेहरों पर उत्साह साफ दिखाई दे रहा है। दूर-दराज राज्यों से श्रद्धालुओं का लगातार आगमन हो रहा है और पूरा क्षेत्र इन दिनों भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर दिखाई दे रहा है।
















