वॉशिंगटन/तेहरान। मध्य पूर्व में जारी भीषण संघर्ष के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा फैसला लेते हुए ईरान के एनर्जी प्लांटों पर हमलों को 10 दिनों के लिए रोकने की घोषणा की है। बताया जा रहा है कि यह कदम ईरानी सरकार के अनुरोध के बाद उठाया गया है, जिससे क्षेत्र में तनाव कम करने की कोशिश की जा रही है।
ट्रंप के इस ऐलान के बाद मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ईरानी सेना और जनता की सराहना करते हुए कहा कि उनके बलिदानों ने “ऐतिहासिक जीत” का मार्ग प्रशस्त किया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्होंने लिखा,
“ईरान के नायकों ने 25 रातों तक डटे रहकर देश के लिए गर्व का इतिहास रचा है। कोई भी ईरान और उसके लोगों को अल्टीमेटम नहीं दे सकता।”
हालांकि, इजरायल की ओर से तेहरान समेत कई इलाकों पर हमले लगातार जारी हैं। इजरायली रक्षा बल (IDF) ने राजधानी में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। इस युद्ध का असर अब पड़ोसी देशों तक भी फैल चुका है और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है।
ईरान के उप स्वास्थ्य मंत्री अली जाफरियन के अनुसार:
- 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए संघर्ष में
- ईरान में अब तक 1,937 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है
यह आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है, जबकि अन्य देशों में भी हताहतों की संख्या में इजाफा हो रहा है।
यह युद्ध 28 फरवरी 2026 को तब शुरू हुआ, जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई वरिष्ठ सैन्य और सुरक्षा अधिकारी मारे गए।
इस सैन्य अभियान के प्रमुख उद्देश्य बताए जा रहे हैं:
- ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करना
- बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता खत्म करना
- ईरानी शासन को कमजोर करना
हालांकि ट्रंप द्वारा हमलों को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला एक राहत संकेत माना जा रहा है, लेकिन जमीनी हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण हैं। इजरायल के लगातार हमले और ईरान की सख्त प्रतिक्रिया यह संकेत दे रहे हैं कि संघर्ष अभी थमने वाला नहीं है।
आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह 10 दिन की राहत शांति की ओर कदम है या केवल एक रणनीतिक विराम।














