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भारत ने अमेरिका को कहा — “हम धमकियों में नहीं आएंगे, ट्रेड डील के लिए ट्रंप के कार्यकाल का इंतजार करेंगे”

नई दिल्ली/वाशिंगटन: भारत-अमेरिका के बीच लंबे समय चली व्यापार वार्ता के बाद जो ट्रेड डील बनी है, उसके पीछे खुलासे सामने आए हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोवल ने अमेरिका से बातचीत के दौरान कड़ा रुख अपनाया था।

रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर 2025 में डोवल ने अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से कहा था कि भारत किसी भी तरह की ‘बुलिंग’ या दबाव को स्वीकार नहीं करेगा। अगर अमेरिका अपनी आलोचना और घमंडी रवैये को कम नहीं करेगा तो भारत ट्रेड डील के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के खत्म होने (2029) तक इंतजार करने को तैयार है।

डोवल ने रुबियो से यह भी कहा कि ट्रंप और उनके सहयोगी भारत पर सार्वजनिक आलोचना बंद करें, ताकि संबंधों को सुधारा जा सके। भारत ने स्पष्ट कर दिया था कि वह अमेरिकी दबाव में नहीं झुकेगा और अपने फैसलों को लेकर स्वतंत्र रहेगा।

बाद में, इस बैठक के बाद ट्रंप और उनके सलाहकारों के तेवर में बदलाव देखा गया और ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके जन्मदिन पर फोन कर शुभकामनाएँ भी दीं। इस कदम से संकेत मिला कि दोनों देशों की बातचीत में नरमी आई।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस “कठोर रुख” ने भारत को बेहतर स्थिति में खड़ा किया और अंततः दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में मदद की।

इस रिपोर्ट से यह साफ होता है कि भारत ट्रेड डील को केवल ‘अमेरिकी जीत’ के रूप में नहीं देख रहा, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों और स्वाभिमान को भी प्राथमिकता दे रहा है।