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Strait of Hormuz में तनाव बढ़ा, क्या United States–Iran युद्ध के करीब?

मध्य-पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Iran ने Strait of Hormuz में युद्धाभ्यास के दौरान मिसाइलें दागी हैं। ईरानी मीडिया में दावा किया गया है कि यह कार्रवाई शक्ति-प्रदर्शन के तौर पर की गई। इसी बीच अमेरिका ने भी क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है, जिससे संभावित टकराव की आशंका गहरा गई है।

ईरान ने अपनी बैलेस्टिक मिसाइल ‘खुर्रमशहर-4’ का एआई आधारित वीडियो जारी कर अमेरिका और इजरायल को चेतावनी दी है। ईरानी सेना का कहना है कि वह अपनी मिसाइल क्षमता पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी। तेहरान का स्पष्ट रुख है कि उसकी बैलेस्टिक मिसाइलें उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा हैं।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान ने “समझदारी” नहीं दिखाई तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

उधर, अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने भी ईरानी शासन को लेकर सख्त बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ समझौता करना आसान नहीं है क्योंकि वहां की नीतियां धार्मिक नेतृत्व के प्रभाव में तय होती हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने अपने एयरक्राफ्ट कैरियर USS Gerald R. Ford को उसके स्ट्राइक ग्रुप के साथ क्षेत्र की ओर बढ़ाया है। इससे पहले भी अमेरिकी नौसेना की मजबूत मौजूदगी फारस की खाड़ी में बनी हुई है।

इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu का कहना है कि जब तक ईरान अपनी बैलेस्टिक मिसाइलों पर लगाम लगाने को तैयार नहीं होता, तब तक किसी भी समझौते का कोई मतलब नहीं है। अमेरिकी सीनेटर Lindsey Graham ने तेल अवीव में नेतन्याहू से मुलाकात के बाद कहा कि अमेरिका और इजरायल की रणनीति एक जैसी है और “फैसला हफ्तों में लेना होगा, महीनों में नहीं।”

हालांकि हालात बेहद तनावपूर्ण हैं, लेकिन किसी भी बड़े युद्ध की शुरुआत आमतौर पर अचानक नहीं होती। सैन्य तैनाती और बयानबाजी अक्सर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा होती है।

फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच जेनेवा में बातचीत की संभावना भी बनी हुई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि दोनों पक्ष सैन्य विकल्प खुला रखकर कूटनीतिक दबाव बढ़ा रहे हैं।

अभी तक ऐसी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है कि अगले 24 घंटों में हमला तय है। हालात नाजुक जरूर हैं, लेकिन अंतिम फैसला कूटनीतिक बातचीत और राजनीतिक नेतृत्व के कदमों पर निर्भर करेगा।