अमेरिका का सैन्य ऑपरेशन बन गया वैश्विक विवाद — संयुक्त राष्ट्र ने वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया

हाल ही में अमेरिकी सेना द्वारा वेनेजुएला में चलाए गए सैन्य ऑपरेशन ने दुनिया भर में तहलका मचा दिया है। इस ऑपरेशन में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को सैन्य बल द्वारा पकड़ा गया और संयुक्त राज्य अमेरिका ले जाया गया है — जिससे बहुत गंभीर राजनीतिक, कानूनी और वैश्विक सुरक्षा सवाल उठे हैं।

संयुक्त राष्ट्र और उसके उच्चायुक्तों ने इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून, देश की संप्रभुता और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का गंभीर उल्लंघन बताया है।
✍️ UN मानवाधिकार कार्यालय ने कहा है कि इस तरह की सैन्य दखलअंदाजी वैश्विक सुरक्षा की नींव पर चोट है और इससे अंतरराष्ट्रीय नियमों की अवहेलना होती है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी देश को अपने क्षेत्रीय दावों या राजनीतिक मांगों को पूरा करने के लिए बल का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
UN हाई कमिश्नर Volker Türk ने भी कहा कि वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन अंतरराष्ट्रीय कानून के मूल सिद्धांतों को कमजोर करता है, क्योंकि देशों की क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता का सम्मान करना अनिवार्य है। उन्होंने यह भी कहा कि वेनेजुएला का भविष्य उसके लोगों द्वारा तय होना चाहिए, न कि बाहरी ताकतों द्वारा जबरन निर्णय लिया जाना चाहिए।

अमेरिका का कहना है कि यह ऑपरेशन एक कानूनी कार्यवाही और नशे के खिलाफ कार्रवाई के तहत किया गया, जिसमें मादुरो और उनकी पत्नी पर नार्को-टेररिज़्म (ड्रग तस्करी) संबंधी अभियोगों के तहत मुकदमा चलाया जाएगा। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे कानून प्रवर्तन सम्बन्धी ऑपरेशन बताया है, जो “विधिक मामलों को आगे बढ़ाने” के उद्देश्य से किया गया था।

इस संकट के बाद वेनेजुएला में अस्थायी रूप से उनकी उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज़ को अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में शपथ दिलाई गई है।

कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और मानवाधिकार समूहों ने कहा है कि एक संप्रभु देश के राष्ट्रपति को उनके ही देश से जबरन उठाकर लेना और विदेश ले जाना अंतरराष्ट्रीय कानूनों तथा संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का उल्लंघन है।

कुछ देशों ने अमेरिका की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है और इसे वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बताया है।

इस विवाद ने वैश्विक राजनीति में तनाव बढ़ा दिया है और अमेरिका-वेनेजुएला संबंधों के साथ-साथ पूरे लैटिन अमेरिका में प्रतिक्रिया की लहर भी फैला दी है।
यह मामला अब अंतरराष्ट्रीय अदालतों, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और वैश्विक कूटनीति मंचों में भी चर्चा का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केंद्रीय सिद्धांतों — जैसे संप्रभुता, हिंसा का दुरुपयोग न करना, और न्यायिक प्रक्रियाओं का पालन — को चुनौती देता है, और इसके प्रभाव लंबे समय तक वैश्विक राजनीति पर पड़ सकते हैं।