देहरादून: उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और गौरवपूर्ण इतिहास को संजोए रखने वाली गढ़वाली भाषा के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में साईं सृजन पटल मासिक पत्रिका ने एक सराहनीय कदम उठाया है। पत्रिका प्रबंधन ने अपनी मासिक पत्रिका में गढ़वाली भाषा के लिए एक विशिष्ट पृष्ठ आरक्षित करने का निर्णय लिया है, जो न केवल गढ़वाली साहित्य को मंच देगा, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
पत्रिका के संस्थापक प्रो. (डॉ.) के.एल. तलवाड़ ने बताया कि इस विशेष पृष्ठ के माध्यम से गढ़वाली साहित्य, कविता, लोककथाएँ, लोकगीत, नाटक, लोककला एवं सांस्कृतिक परंपराओं को समर्पित सामग्री प्रकाशित की जाएगी। उनका कहना है कि यह पहल गढ़वाली भाषा की महत्ता को उजागर करेगी और क्षेत्रीय संस्कृति को नई पहचान दिलाएगी।
पटल से जुड़े हिंदी शोधार्थी अंकित तिवारी ने कहा कि यह पृष्ठ गढ़वाली भाषा के गौरवमयी अतीत को पुनर्जीवित करने का माध्यम बनेगा और युवा पीढ़ी को अपनी भाषा व संस्कृति से जोड़ने में प्रेरक सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि इस मंच के जरिए गढ़वाली साहित्य को न केवल स्थानीय, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिलने की संभावना है।
साईं सृजन पटल का यह प्रयास गढ़वाली भाषा को केवल संरक्षित रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे एक जीवंत सांस्कृतिक धरोहर के रूप में विकसित करने की दिशा में भी एक मजबूत पहल है। यह विशेष पृष्ठ गढ़वाली समुदाय में भाषा के प्रति गर्व की भावना जागृत करेगा और उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को और अधिक सशक्त बनाएगा।














