रूस ने यूक्रेन पर हाइपरसोनिक “ओरेश्निक” मिसाइल से बड़ा हमला किया

रूस-यूक्रेन युद्ध में आज एक बेहद गंभीर मोड़ आया है। रूस की सेना ने अपनी नई हाइपरसोनिक/बैलिस्टिक मिसाइल “ओरेश्निक” का इस्तेमाल करके यूक्रेन के महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर और शहरों को निशाना बनाया है।

🔹 रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह मिसाइल हमला रूस पर यूक्रेन द्वारा ड्रोन हमले के जवाब में किया गया था, हालांकि यूक्रेन और पश्चिमी देशों ने इस दावे को खारिज किया है।
🔹 कीव और ल्विव जैसे प्रमुख शहरों में भी हमले देखे गए हैं, जिससे नागरिकों में भारी डर और नुकसान की स्थितियाँ पैदा हुई हैं।
🔹 कीव में हुए हमलों में कई लोग जख्मी और घायल हुए हैं, साथ ही इमारतों को नुकसान पहुंचा है और पानी-बिजली आपूर्ति बाधित हुई है।

“ओरेश्निक” मिसाइल — क्या है यह?

• ओरेश्निक एक नई-पीढ़ी की हाइपरसोनिक इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल है, जो ध्वनि की रफ्तार से लगभग 10 गुना तेज़ (Mach-10) उड़ सकती है।
• इस मिसाइल को पश्चिमी देशों और नाटो की मिसाइल रक्षा प्रणालियों से लगभग रोकना असंभव माना जा रहा है।
• यह मिसाइल विभिन्न प्रकार के वारहेड ले जा सकती है, और इसकी रेंज लगभग 5,000 कि.मी. तक हो सकती है — जिससे यह यूक्रेन के अलावा यूरोप के कई हिस्सों को भी निशाना बनाए सकती है।
• विशेषज्ञों के अनुसार, ओरेश्निक कई स्वतंत्र लक्ष्य वारहेड तक ले जा सकती है, जो बड़े इलाके में भारी तबाही कर सकती है।

🇺🇦 यूक्रेन की प्रतिक्रिया — राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की और अधिकारियों ने रूस के हमलों की निंदा की है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से सख्त जवाब देने की अपील की है।

🌐 यूरोप-नाटो की चिंताएँ — इस तरह की उन्नत मिसाइलों के इस्तेमाल से नाटो देशों के बीच सुरक्षा को लेकर तनाव बढ़ गया है, क्योंकि इन मिसाइलों की रेंज नाटो क्षेत्र तक फैल सकती है।

रूस-यूक्रेन युद्ध में लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले जारी हैं। पिछले साल
• सुमी पर मिसाइल हमला हुआ जिसमें 21 लोग मारे गए और 80 से अधिक घायल हुए थे।
• रूस ने 500 से ज्यादा ड्रोन और मिसाइलों से एक बड़े हमले की कोशिश की थी, जिससे यूक्रेन के कई इलाकों को नुकसान पहुंचा था।

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध तेज़ और भयावह रूप से जारी है। रूस ने आज फिर ओरेश्निक जैसे अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया है, जिससे यह संघर्ष और भी गंभीर और व्यापक रूप ले रहा है।
इस स्थिति के बीच, युद्ध के थमने के कोई निकट संकेत दिखाई नहीं दे रहे हैं, और यूरोपीय क्षेत्र में सुरक्षा-रणनीति को लेकर भी चिंताएँ बढ़ी हैं।