नई दिल्ली — पूर्व उपराष्ट्रपति एम. हामिद अंसारी के एक हालिया बयान ने देश की राजनीति में बड़े पैमाने पर विवाद शुरू कर दिया है। अंसारी ने एक इंटरव्यू में कहा कि मध्यकालीन शासक महमूद गजनी और लोदी वंश को इतिहास में “विदेशी आक्रमणकारी” नहीं बल्कि “हिंदुस्तानी लुटेरे” कहा जाना चाहिए। उनके इस ऐतिहासिक कथन ने तुरंत राजनीतिक घमासान को जन्म दिया है।
बीजेपी ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जिसमें पार्टी ने न केवल अंसारी को निशाना बनाया है बल्कि कांग्रेस और उसके समर्थनकर्ता समूहों पर भी आरोप लगाया है कि वे इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं।
बीजेपी का आरोप
• भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि यह बयान इतिहास की सत्यता को कमजोर करता है और ऐसे आक्रमणों को सही ठहराने जैसा है जो देश के गौरवशाली अतीत के खिलाफ हैं।
• पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व Twitter) पर वीडियो शेयर करते हुए कहा कि गजनी ने सोमनाथ मंदिर को बहुसंख्यक इतिहासकारों के अनुसार नुकसान पहुँचाया, फिर भी उसे “भारतीय” कहते हुए सम्मान देना गलत प्रतीत होता है।
• भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का “इकोसिस्टम” ऐसे बयान देने वालों को समर्थन देता है और राष्ट्र-इतिहास के प्रति एक बेहद संवेदनहीन मानसिकता को दर्शाता है।
बीजेपी की और प्रतिबद्ध टिप्पणियाँ
• राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि इतिहासकारों द्वारा वर्णित विदेशी आक्रमण और उनके प्रभाव को सफेद-धोने की कोशिश षड्यंत्रकारी है.
• भाजपा ने यह भी सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी, ऐसे बयान से सहमत हैं या नहीं — जिससे राजनीतिक बहस और बढ़ गई है।
राजनीतिक एवं सामाजिक परिप्रेक्ष्य
यह विवाद केवल एक ऐतिहासिक बयान से आगे बढ़कर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और असमंजस का कारण बन गया है। कई राजनीतिक विश्लेषक इसे इतिहास, राष्ट्रीय पहचान और भावनात्मक संवेदनाओं के संगम पर फैली बहस के रूप में देख रहे हैं। इससे पहले भी ऐसे बयान राजनीतिक दलों के बीच तेज़ प्रतिक्रियाओं को जन्म देते रहे हैं, खासकर जब वे इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े हों।















