उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर आयोजित बंद का मिला-जुला प्रभाव

उत्तराखंड में 19-वर्षीय अंकिता भंडारी हत्याकांड के खिलाफ रविवार को जिस राज्यव्यापी बंद (बन्ध) का आह्वान किया गया था, उसका प्रभाव मिला-जुला देखने को मिला है। इस बंद का उद्देश्य अंकिता के लिए न्याय, निष्पक्ष जांच और CBI जांच की मांग को फिर से जोर देना था।

पर्वतीय क्षेत्रों जैसे गढ़वाल के रुद्रप्रयाग, पौड़ी, श्रीनगर और गोपेश्वर में बंद का असर काफी साफ दिखा, बाजार बंद रहे और आम जनजीवन प्रभावित हुआ। कई स्थानों पर टैक्सी सेवाएँ बंद रहीं और व्यापारियों ने समर्थन जताया।

मैदानी जिलों जैसे देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश और कुमाऊँ मंडल में बंद का असर सीमित या आंशिक रहा। कई बाजार खुले रहे और यातायात सामान्य रूप से चला।

व्यापारी संगठनों ने बंद का समर्थन वापस ले लिया, विशेष रूप से इसलिए कि राज्य सरकार ने CBI जांच की सिफारिश पहले ही कर दी है, जिससे बंद की “जरूरत” को लेकर मतभेद दिखे।

बंद के दौरान कई इलाकों में प्रदर्शन और जुलूस निकाले गए, जिनमें हाथों में न्याय, दोषियों को कड़ी सजा, और निष्पक्ष जांच की मांग लिखी तख्तियाँ थीं। कई लोगों ने मृत प्रतिभागियों के लिए न्याय तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प जताया।

कई प्रदर्शनकारियों और सामाजिक संगठनों का कहना रहा कि मामले में VIP का नाम उजागर होना चाहिए और investigation (जाँच) केवल दोषियों को सज़ा देने तक सीमित न रहे।

पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा कड़ी कर रखी थी, विशेष रूप से बाजारों और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किया गया, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

यातायात और रोज़मर्रा की गतिविधियाँ अधिकांश स्थानों पर सामान्य रहीं, खासकर उन इलाकों में जहां बंद का प्रभाव कमजोर था।

बंद ने राज्य के पहाड़ों में अधिक असर डाला, जबकि मैदानी और अधिक विकसित इलाकों में इसका असर कम या आंशिक रहा। कुछ व्यापारियों और संगठनों ने समर्थन वापस ले लिया है, जबकि दूसरे लोग फिर भी न्याय और सुप्रीम कोर्ट निगरानी वाली CBI जांच की मांग कर रहे हैं।