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उत्तराखंड में कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर लगाया जांच भटकाने का आरोप

देहरादून/नई दिल्ली: कांग्रेस ने उत्तराखंड की भाजपा सरकार पर आरोप लगाया है कि वह अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच को भटकाने और सीबीआई जांच को प्रदर्शन की तरह छोड़ देने का प्रयास कर रही है। यह आरोप प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने लगाया है, जिन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा सीबीआई जांच की घोषणा के बावजूद अब तक सीबीआई को औपचारिक रूप से जांच सौंपे जाने का कोई स्पष्ट सबूत सामने नहीं आया है।

गोदियाल ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि पीड़िता के माता-पिता की राय लेकर सीबीआई जांच कराई जाएगी, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार ने सीबीआई को प्रतिवेदन भेजा भी है या नहीं।

📌 कांग्रेस के मुख्य आरोप
🔹 सीबीआई जांच में देरी और लैपस

कांग्रेस का कहना है कि सीबीआई जांच की सिफारिश के 15-17 दिन बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे लग रहा है कि जांच को कमजोर या भटकाया जा रहा है.

🔹 एफआईआर और जांच की दिशा

गोदियाल ने आरोप लगाया कि सरकार ने अंकिता के परिवार की मांग की बजाय एक तीसरे पक्ष की एफआईआर के आधार पर सीबीआई जांच कराने की बात कही, जिससे संदेह पैदा होता है कि मुख्य तथ्यों की जांच से ध्यान हटाया जा रहा है.

🔹 नार्को टेस्ट और साक्ष्य

कांग्रेस ने यह भी कहा कि आरोपियों ने खुद नार्को टेस्ट की मांग की थी, लेकिन सरकारी पक्ष ने इसका विरोध किया, जो इस तरह के मामलों में दुर्लभ है। पार्टी ने आरोप लगाया कि ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि नार्को टेस्ट से कुछ सत्ताधारी दल के नेताओं के नाम सामने आ सकते थे.

🔹 वीआईपी एंगल और जांच

गोदियाल ने कहा कि मामले में वीआईपी के शामिल होने के यथार्थ के आधार पर जांच होनी चाहिए थी, लेकिन सरकार ने कदम पीछे खींच लिया, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि सरकार ने सीबीआई को जांच सौंपी है या नहीं।

कांग्रेस लगातार यह मांग कर रही है कि सीबीआई जांच को न्यायाधीश की निगरानी में कराया जाए, साथ ही जांच के बिंदुओं को सार्वजनिक किया जाए और एसआईटी की पूर्व प्रमुख को, जो अब सीबीआई में हैं, इस जांच से अलग रखा जाए.

दलित किसान आत्महत्या मामले को भी जोड़ते हुए गोदियाल ने पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं और मांग की है कि उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जाए.

अंकिता भंडारी केस 2022 में शुरू हुआ था जब 19-साल की अंकिता का कथित तौर पर एक रिज़ॉर्ट में हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद मामले में आरोपी गिरफ्तार हुए और मई 2025 में तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

लेकिन वीआईपी एंगल, नार्को टेस्ट, साक्ष्यों के साथ छेड़-छाड़ के आरोप और जांच को सीबीआई को सौंपे जाने में कथित देरी ने इसे राजनीतिक विवाद का रूप दे दिया है। कांग्रेस इसे झुकाव-भरी और कमजोर जांच कहते हुए सवाल उठा रही है।

भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप करार दिया है और कहा है कि हमने आरोपियों को गिरफ्तार किया, उन्हें जीवन-दंड मिला और सरकार निष्पक्षता से काम कर रही है। यह मामला आगामी चुनावी राजनीति में भी एक बड़ा मुद्दा बनता दिख रहा है।