होर्मुज संकट पर वैश्विक बैठक: भारत ने शांति और संवाद पर दिया जोर

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने के उपायों पर एक अहम अंतरराष्ट्रीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें भारत ने भी हिस्सा लिया। United Kingdom की पहल पर हुई इस बैठक में 60 से ज्यादा देशों ने भाग लिया। भारत की ओर से विदेश सचिव Vikram Misri ने देश का प्रतिनिधित्व किया।

Iran, United States और Israel के बीच बढ़ते टकराव ने हालात को और गंभीर बना दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के बयान के बाद तनाव और तेज हो गया है। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट का बंद होना वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बन गया है।

बैठक में विक्रम मिसरी ने कहा कि इस संकट का सबसे ज्यादा असर भारत पर पड़ा है।

अब तक 3 भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है
ये सभी विदेशी जहाजों पर काम कर रहे थे
भारत ने साफ कहा कि इस समस्या का समाधान सिर्फ बातचीत और कूटनीति से ही संभव है

उन्होंने सभी देशों से अपील की कि तनाव कम करें और संवाद के जरिए समाधान निकालें।

Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है।

वैश्विक तेल और LNG का लगभग 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है
इसके अवरुद्ध होने से तेल और गैस की कीमतों में उछाल आया है
भारत, चीन, जापान जैसे देशों की ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हो रही है

भारत के लिए यह और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उसकी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है।

यह एक बहुपक्षीय ऑनलाइन बैठक थी, जिसे Keir Starmer की सरकार ने आयोजित किया।

इसका उद्देश्य:

होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना
वैश्विक सप्लाई चेन को स्थिर करना
तनाव कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना

होर्मुज संकट सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि इस स्थिति से निकलने का एकमात्र रास्ता संवाद, कूटनीति और शांति है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे पर और बड़े फैसले हो सकते हैं।