दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बिहार के गया में संचालित एक फर्जी दवा फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में गिरोह के मास्टर कोऑर्डिनेटर अरुण (59) को गिरफ्तार किया गया। अब तक इस मामले में कुल 9 कार्टेल सदस्यों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
यह कार्रवाई एफआईआर संख्या 273/25, धारा 22 एनडीपीएस एक्ट, थाना क्राइम ब्रांच के तहत की गई। डीसीपी/एएनटीएफ संजीव कुमार यादव के नेतृत्व में, एसीपी सतेंद्र मोहन की निगरानी और इंस्पेक्टर नितेश कुमार के नेतृत्व में गठित टीम ने यह सफलता हासिल की। पिछले सप्ताह गिरफ्तार आरोपी तनीष्क से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस गया पहुंची और जांच के दौरान अरुण को धर दबोचा।
जांच में सामने आया कि आरोपी बिना किसी वैध लाइसेंस के दवाइयों और वायल बनाने की फैक्ट्री चला रहा था। मौके पर गया ड्रग विभाग की टीम को भी बुलाया गया। पुलिस ने भारी मात्रा में नकली दवाएं, कच्चा माल और मशीनरी जब्त की है।
बरामदगी का विवरण:
- नकली टैबलेट: 1,19,800 जिंक टैबलेट और 42,480 एज़िथ्रोमाइसिन टैबलेट
- कच्चा माल: 27 किलोग्राम पैरासिटामोल और 5 किलो से अधिक अवैध ट्रामाडोल पाउडर
- अन्य सामान: 444 डिलोना एक्वा एंप्यूल और दवा निर्माण में प्रयुक्त भारी मशीनरी
- कीमत: बरामद ट्रामाडोल की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 5 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई
जांच में खुलासा हुआ कि यह नेटवर्क अवैध रूप से ओपिओइड्स, साइकोट्रोपिक पदार्थ, नकली दवाएं और सिरप तैयार कर फर्जी मेडिकल स्टोर्स तथा क्षेत्रीय सप्लायरों के जरिए बाजार में खपा रहा था। फैक्ट्री में तस्करी कर लाए गए ट्रामाडोल पाउडर को प्रोसेस कर टैबलेट बनाई जाती थीं, जिन्हें हेरोइन के विकल्प के रूप में अवैध बाजार में ऊंची कीमत पर बेचा जाता था। कच्चे माल की खरीद से लेकर निर्माण और सप्लाई तक की पूरी प्रक्रिया गैरकानूनी तरीके से संचालित की जा रही थी।
पुलिस के अनुसार, लगातार तकनीकी निगरानी, विभिन्न राज्यों में छापेमारी, हजारों किलोमीटर की यात्रा और हाई-ऑक्टेन कार चेज के बाद इस नेटवर्क का भंडाफोड़ किया गया। इससे पहले पटना में भी एक फर्जी फार्मास्यूटिकल यूनिट का खुलासा किया जा चुका है। अब तक दो अवैध फैक्ट्रियों को ध्वस्त कर 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
अरुण (59), मूल निवासी गया (बिहार), कम समय में अधिक मुनाफा कमाने के लालच में बड़े पैमाने पर अवैध दवा निर्माण में शामिल था। वह गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर कच्चा माल मंगवाता और अपनी फैक्ट्री में ओपिओइड्स व नकली दवाएं तैयार कर विभिन्न राज्यों में सप्लाई करता था। एएनटीएफ की टीम अन्य फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है और मामले की जांच जारी है।















