ताजा खबरें >- :
उत्तराखंड में अब डेंगू के रूप में एक दूसरी चुनौती खड़ी

उत्तराखंड में अब डेंगू के रूप में एक दूसरी चुनौती खड़ी

उत्तराखंड में कोरोना के मरीजों का ग्राफ गिर रहा है। पर अब डेंगू के रूप में एक दूसरी चुनौती खड़ी है। बीते तीन साल में डेंगू के मोर्चे पर कुछ राहत रही, पर सरकारी तंत्र किसी भी तरह का रिस्क लेने के मूड में नहीं है। ऐसे में जिला प्रशासन, नगर निगम व स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार डेंगू का अपना एक चक्र होता है। करीब तीन-चार साल में यह ज्यादा घातक होकर सामने आता है। पिछले दो साल के आंकड़े देखें तो डेंगू के कम ही मामले सामने आए हैं। ऐसे में इस बात का पूरा अंदेशा है कि डेंगू एक बार फिर अपने चक्र के अनुसार असर दिखा सकता है। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण अधिकारी सुभाष जोशी के अनुसार डेंगू को लेकर अभी से एहतियात बरतनी जरूरी है। क्योंकि मात्र 10 दिन के अंदर लार्वा बनने से लेकर मच्छर बनने तक का काम हो जाता है।

लापरवाही हुई तो कुछ ही वक्त में कितने मच्छर पनप जाएंगे यह अनुमान लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि नगर निगम, कैंट बोर्ड को नियमित फागिंग के लिए कहा गया है। इसके अलावा कुंभ में खरीदी गई दस फागिंग मशीन हरिद्वार से भी मिली हैं। इन्हें विकासनगर, सहिया, कालसी, सेलाकुई, हरबर्टपुर, डोईवाला समेत आदि क्षेत्रों में दिया गया है। सरकारी व निजी अस्पतालों में बेड आरक्षित किए जा रहे हैं।डेंगू के मरीजों के लिए अस्पतालों में आइसोलेशन बेड तैयार किए जा रहे हैं। प्रथम चरण में सरकारी अस्पतालों में 141 बेड आरक्षित होंगे। इसके अलावा सात अस्पतालों में डेंगू की एलाइजा जांच की सुविधा प्रदान की जा रही है। इनमें दून के अलावा विकासनगर व ऋ षिकेश के अस्पताल भी शामिल हैं।

Related Posts