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मैदानी इलाकों में अंधड़ चलने का यलो अलर्ट जारी, पर्वतीय इलाकों में गरज के साथ बौछार होने की संभावना

मैदानी इलाकों में अंधड़ चलने का यलो अलर्ट जारी, पर्वतीय इलाकों में गरज के साथ बौछार होने की संभावना

आज चारधाम यात्रा के लिए जा रहे हैं तो अपने पास छाता या बरसाती का इंतजाम कर लें, क्‍योंकि मौसम विभाग ने बुधवार को चारधाम रूट सहित पर्वतीय इलाकों में गरज के साथ बौछार होने की संभावना जताई है। व‍हीं मैदानी इलाकों में अंधड़ चलने का यलो अलर्ट जारी किया गया है।मौसम विभाग के अलर्ट के बीच बुधवार को सुबह साढ़े दस बजे देहरादून में घने बादल छा गए और गर्जना के साथ तेज आंधी चलने लगी। जिसके बाद बारिश शुरू हो गई। पछवा दून में भी बारिश शुरू हो गई। मसूरी में घने बादल छाए हुए हैं, बारिश की संभावना बनी हुई है। हरिद्वार और ऋषिकेश में भी आंधी के साथ तेज बारिश हुई। टिहरी में बादल छाए है। वहीं रुड़की में धूप खिली है।सोमवार को ताजा पश्चिमी विक्षोभ ने राज्य में दस्तक दी। इससे दिनभर उमस के बाद शाम को अंधड़ के साथ मैदानी इलाकों में झमाझम बारिश हुई। देहरादून समेत अन्य मैदानी जिलों में 60 से 70 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चले अंधड़ में कई जगह पेड़ और विद्युत पोल गिर गए। इससे काफी नुकसान होने की सूचना है।

मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह के अनुसार प्रदेश में 21 अप्रैल तक मौसम का मिजाज बदला रह सकता है। ऐसे में उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में गर्जन के साथ बारिश हो सकती है। मैदानी इलाकों में अंधड़ के साथ बौछारों की आशंका है।सोमवार रात अंधड़ व बारिश ने जगह-जगह कहर बरपाया। कुमाऊं में कालाढूंगी, टांडा जंगल, बाजपुर व गदरपुर में चार लोगों की मौत हो गई। वहीं अलग-अलग जगहों पर 10 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। धारचूला के व्यासनगर खोतिला में भू-कटाव से एक मकान हवा में झूल गया और आधा दर्जन मकान खतरे की जद में आ गए।

उत्तराखंड में बिजली संकट के बीच उत्पादन बढऩे से कुछ राहत मिलती दिख रही है। पहाड़ों में बारिश के कारण नदियों में जलप्रवाह बढऩे से उत्तराखंड के जल विद्युत गृहों में उत्पादन पटरी पर आने लगा है। कटौती कम होने के साथ ही ऊर्जा निगम पर बाजार से महंगी बिजली खरीद का बोझ भी कुछ कम हुआ है। पिछले एक सप्ताह में जल विद्युत परियोजनाओं से उत्पादन में करीब 200 मेगावाट की वृद्धि हुई है। पिछले एक माह में प्रदेश में बिजली की खपत में भारी इजाफा हुआ है। उपलब्धता मांग के अनुरूप नहीं हो पा रही है। ऐसे में बाजार से बिजली खरीद और कटौती की जा रही थी। हालांकि, अब उपलब्धता बढऩे से बाजार से बिजली खरीद काफी कम हो गई है। जबकि, प्रदेश में बिजली कटौती भी अब बंद कर दी गई है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती कर संतुलन बनाया जा रहा है। पिछले दो दिनों में ऊर्जा निगम को कुछ राहत जरूर मिली है।

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