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उत्तराखंड विधानसभा के तीन सत्र हुए, जिनमें सदन कुल 80 घंटे चला; जाने पूरी खबर

उत्तराखंड विधानसभा के तीन सत्र हुए, जिनमें सदन कुल 80 घंटे चला; जाने पूरी खबर

उत्तराखंड की सर्वोच्च पंचायत, यानी विधानसभा इस वर्ष तमाम खट्टे-मीठे अनुभवों का गवाह भी बनी। सालभर में विधानसभा के तीन सत्र हुए, जिनमें सदन कुल 80 घंटे चला। 68 मिनट का व्यवधान भी हुआ। विधायी कामकाज के दृष्टिकोण से देखें तो सरकार ने सदन में 28 विधेयक पारित कराए। इनमें प्रदेश में चर्चा के केंद्र में रहे उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन अधिनियम को निरस्त करने संबंधी विधेयक भी शामिल है। इसके अलावा सरकार ने सरकार ने अपनी उपलब्धियां गिनाईं तो भविष्य का विजन भी सामने रखा। सदन में विपक्ष ने सरकार को तमाम विषयों पर घेरने में अपने प्रयासों में कोई कसर नहीं छोड़ी।इस वर्ष विधानसभा सत्र की शुरुआत ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण से हुई। एक मार्च को विधानसभा का बजट सत्र राज्यपाल के अभिभाषण के साथ शुरू हुआ। तत्कालीन राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने विपक्ष के हंगामे के बीच अपना अभिभाषण पढ़ा, जिसमें सरकार की उपलब्धियों को गिनाने के साथ ही सबका साथ-सबका विकास की अवधारणा के साथ उत्तराखंड को विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने के संकल्प को रखा गया। इसी सत्र में सरकार ने बजट पेश किया, जिसमें सरकार की उपलब्धियां और भविष्य का रोडमैप रखा गया। तब हुए राजनीतिक घटनाक्रम के बाद सरकार ने जल्दी में बजट सत्र निबटाया। गैरसैंण में छह दिन चले सत्र के दौरान 10 विधेयक पारित किए गए। सत्र के बाद नौ मार्च को प्रदेश सरकार में नेतृत्व परिवर्तन हो गया था। विधानसभा का दूसरा और तीसरा सत्र देहरादून में हुआ। द्वितीय सत्र में सरकार ने आठ और अंतिम सत्र में 10 विधेयक पारित कराए।

बजट सत्र में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बजट पेश करते हुए गैरसैंण को उत्तराखंड की तीसरी कमिश्नरी बनाने की घोषणा की। इसमें चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर व अल्मोड़ा जिलों को शामिल करने की बात कही गई। यद्यपि, घोषणा के बाद से ही इस कमिश्नरी का विरोध शुरू हो गया। सरकार में नेतृत्व परिवर्तन के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने त्रिवेंद्र सरकार की इस घोषणा को वापस ले लिया।गैरसैंण सत्र से विधानसभा की कार्यवाही की वेबकास्टिंग भी शुरुआत भी हुई। यानी सदन की कार्यवाही का सीधा प्रसारण हुआ। यह सिलसिला दूसरे और तीसरे सत्र के दौरान भी चलता रहा।कोरोना संक्रमण के साये में देहरादून में हुए विधानसभा के दूसरे सत्र में सदन के सभामंडप का विस्तार दर्शक व पत्रकार दीर्घा के साथ ही कक्ष संख्या 107 तक किया गया था। यद्यपि, तीसरे सत्र तक कोरोना संक्रमण के मद्देनजर स्थिति नियंत्रण में होने पर सभी विधायकों के लिए सभामंडप में ही बैठने की व्यवस्था हुई।उत्तराखंड देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है, जहां विधानसभा में आजादी के अमृत महोत्सव पर चर्चा हुई। विधानसभा के इस साल के अंतिम सत्र में यह चर्चा हुई, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने ही भागीदारी की।विधानसभा का साल के आखिर में हुआ शीतकालीन सत्र चुनावी रंग में भी रंगा नजर आया। राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ने ही सदन के माध्यम से मिले मौके को भुनाने में कमी नहीं छोड़ी।

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