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केदारनाथ की प्रतिकृति में दिखेगी उत्तराखंड संस्कृति झलक,

केदारनाथ की प्रतिकृति में दिखेगी उत्तराखंड संस्कृति झलक,

केदारनाथ मंदिर की प्रतिकृति में अब गढ़वाल के साथ ही कुमाऊंनी संस्कृति की झलक भी देखने को मिलेगी। इसके लिए रुद्रप्रयाग जिले में महिला समूहों की ओर से केदारनाथ मंदिर की जो प्रतिकृति तैयार की जा रही हैं, उनमें कुमाऊं की प्राचीन ऐंपण (अल्पना) लोक चित्रकला का भी समावेश होगा। इससे जहां महिला समूहों की आर्थिकी भी सशक्त होगी। आपदा के बाद केदारपुरी को पहाड़ी शैली सजाया-संवारा जा रहा है। यहां हाट बाजार में जिला प्रशासन ने 50 दुकानें बनाई हैं, जिनमें स्थानीय शिल्प व उत्पादों को देश-विदेश से आने वाले यात्रियों को बेचा जाएगा। इसके साथ ही अब धाम में यात्रियों को कुमाऊं की झलक भी देखने को मिलेगी। इसके लिए प्रशासन की ओर से शारदा ग्राम संगठन मक्कू व नवज्योति ग्राम संगठन परकंडी की 34 महिलाओं को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत मंदिर की प्रतिकृति बनाने के साथ कुमाऊं की प्राचीन ऐंपण कला का प्रशिक्षण भी दिया गया है।

वर्तमान में केदारनाथ हेलीपेड के आसपास यात्रियों के लिए मंदिर की प्रतिकृति रखी जा रही हैं। भविष्य में इन्हें ऑनलाइन अमेजन, फ्लिपकार्ट, मिन्त्रा आदि कंपनियों के माध्यम से भी उपलब्ध कराया जाएगा। मंदिर की इस प्रतिकृति के रंग मंदिर के वास्तविक रंगों के समान हैं। ऐंपण कुमाऊं की एक प्रसिद्ध लोक चित्रकला है। इसका सामाजिक, सांस्कृतिक एवं धाॢमक आयोजनों में विशेष महत्व है। परंपरागत ऐंपण प्राकृतिक रंगों जैसे, गेरू (एक प्रकार की लाल मिट्टी) और चावल के आटे (बिस्वारं) से बनाई जाती है। इसमें महिलाएं विभिन्न प्रकार के चित्र बनाकर घर के आंगन, दरवाजे, दीवार व मंदिरों को सजाती हैं।

जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि स्थानीय महिलाओं के सहयोग से केदारनाथ मंदिर की प्रतिकृति बनाई गई है। महिलाएं पूरे मनोयोग से इस कार्य को कर रही हैं। धीरे-धीरे इससे अन्य ग्रामीण महिलाओं को भी जोड़ा जाएगा। केदारनाथ की प्रतिकृति के साथ ही अराइवल प्लाजा, आस्था पथ व अन्य स्थलों की प्रतिकृति भी यात्रियों को उपलब्ध कराई जाएंगी। बताया कि टाटा ट्रस्ट आदि कंपनियों की मांग है कि अधिक से अधिक संख्या में प्रतिकृति उपलब्ध करायी जाएं।

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