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टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड के टिहरी बांध में पहली बार 830 मीटर जलस्तर

टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड के टिहरी बांध में पहली बार 830 मीटर जलस्तर

टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (टीएचडीसी) के टिहरी बांध में आज शुक्रवार को पहली बार 830 मीटर जलस्तर भरा गया है। टीएचडीसी के अधिशासी निदेशक यूके सक्सेना ने बताया कि जब से टिहरी बांध बना है तब से आज पहली बार वह अवसर आया है कि टिहरी झील का जलस्तर 830 मीटर हो गया है। एक बार वर्ष 2010 में ज्यादा बारिश के कारण झील का जलस्तर 830 मीटर हुआ था, लेकिन इस बार विधिवत रूप से झील का जलस्तर 830 मीटर किया गया है। इससे टिहरी बांध से बिजली उत्पादन भी बढ़ेगा और राजस्व भी ज्यादा आएगा।कहा कि हम ज्यादा बिजली का उत्पादन कर नार्दर्न ग्रिड को दे सकेंगे। अधिशासी निदेशक ने कहा कि टिहरी झील का जलस्तर बढ़ने के कारण 835 मीटर से ऊपर रहने वाले ग्रामीणों के नुकसान का आकलन करने के लिए विशेषज्ञ समिति बनाई गई है। जल्द ही इसके तहत चयनित 415 परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा। इस अवसर पर महाप्रबंधक एसएस पंवार अपर महाप्रबंधक संदीप अग्रवाल टीएस नेगी मनवीर सिंह नेगी आदि मौजूद रहे।

टिहरी बांध परियोजना के इतिहास में 24 सितंबर 2021 उल्लेखनीय दिन साबित हुआ। टिहरी जलाशय में जल स्तर पहली बार 830 मीटर के पूर्ण जलाशय स्तर को छुआ। टीएचडीसी के उप महाप्रबंधक कार्मिक एवं संचार डा. एएन त्रिपाठी ने बताया कि यद्यपि यह परियोजना पिछले 15 वर्षों से लगातार 1000 मेगावाट की पीकिंग पावर के साथ-साथ पेयजल एवं सिंचाई के लिए जल, बाढ़ नियंत्रण, मछली पालन, पर्यटन इत्यादि जैसे अन्य लाभ प्रदान कर रही है, परंतु फिर भी इसकी पूर्ण क्षमता का उपयोग नहीं किया जा सका चूंकि टिहरी जलाशय का स्तर पूर्ण जलाशय स्तर (एफआरएल), ईएल 830 मीटर तक नहीं भरा गया।टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के की ओर परियोजना के लंबित पुनर्वास मुद्दों को उदार दृष्टिकोण से हल करने के बाद विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार एवं उत्तराखंड सरकार के सक्रिय सहयोग से इस विशालकाय लक्ष्य को प्राप्त किया जा सका। इसके बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनता के व्यापक हितों को दृष्टिगत रखते हुए 25 अगस्त 2021 को टिहरी जलाशय के स्तर को इएल 830 मीटर तक भरने की अनुमति प्रदान की। इससे पूर्व टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड को टिहरी जलाशय को पूर्ण स्तर तक भरने की अनुमति नहीं थी तथा परियोजना से जल एवं विद्युत की पूरी क्षमता का दोहन नहीं हो पा रहा था।

टिहरी परियोजना में 260.5 मी. ऊंचा अर्थ एंड रॉक फिल बांध एवं एक भूमिगत विद्युत गृह शामिल है। पावर हाउस में 04 मशीनें लगी हैं जिनमें प्रत्येक मशीन की क्षमता 250 मेगावाट है। टिहरी बांध परियोजना में मानसून के दौरान लगभग 2615 एमसीएम बाढ़ के अधिशेष पानी को संग्रहित करने की क्षमता है।मानसून के बाद, संग्रहित जल उत्तर प्रदेश के गंगा के मैदानी इलाकों में 8.74 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई में काम आता है तथा नई दिल्ली की लगभग 40 लाख आबादी के लिए 300 क्यूसेक पेयजल और उत्तर प्रदेश की लगभग 30 लाख आबादी के लिए 200 क्यूसेक पेयजल उपलब्ध कराता है। वास्तविक अर्थ में टिहरी परियोजना दिल्ली और आगरा की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करती है। परियोजना की वजह से टिहरी कमांड क्षेत्र के किसान वर्ष में तीन फसलों का उत्पादन करने में भी सक्षम हुए हैं।

टिहरी बांध लीन पीरियड के दौरान गंगा नदी में अतिरिक्त पानी छोड़ता है, जिससे हरिद्वार और प्रयागराज में विभिन्न पवित्र स्नान और पर्वों के लिए जल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। यह उत्तराखंड सरकार एवं उत्तर प्रदेश सरकार की मांग के अनुसार कुंभ मेला के दौरान गंगा नदी में जल का समुचित प्रवाह बनाए रखना सुनिश्चित करता है। टिहरी जल विद्युत संयंत्र उत्तरी ग्रिड को 1000 मेगावाट की पीकिंग पावर और सालाना 3000 मिलियन यूनिट से अधिक ऊर्जा प्रदान करता है, जिसमें से 12 प्रतिशत उत्तराखंड राज्य को निश्‍शुल्क प्रदान की जाती है। इस प्रकार, टिहरी परियोजना समाज के लोगों के लिए एक वरदान साबित हुई है और मुख्यनमंत्री के टिहरी जलाशय को पूर्ण स्तर तक भरने के निर्णय के साथ अब ये लाभ और अधिक बढ़ने की संभावना है।टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक आरके विश्नोई के नेतृत्व में निगम के शीर्ष प्रबंधन ने इस बहुप्रतीक्षित लक्ष्य को हासिल करने के लिए उत्तराखंड सरकार को धन्यवाद दिया और राज्य की जनता को बधाई दी।

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