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टैबलेट खरीदने के लिए मिली धनराशि को उत्तराखंड बोर्ड के परीक्षाओं ने बैंक खाते में डंप कर लिया

टैबलेट खरीदने के लिए मिली धनराशि को उत्तराखंड बोर्ड के परीक्षाओं ने बैंक खाते में डंप कर लिया

टैबलेट खरीदने के लिए मिली धनराशि को उत्तराखंड बोर्ड के परीक्षाओं ने बैंक खाते में डंप कर लिया है। कुछ अभिभावकों ने घर के दूसरे कामों में धनराशि खर्च दी। नैनीताल जिले में कुछ छात्र-छात्राएं ऐसे भी हैं जिन तक टैबलेट के 12 हजार रुपये अभी तक नहीं पहुंचे हैं। ऐसे में सरकार की कोशिश साकार होते नहीं दिख रही। वहीं, अधिकारी असमंजस में हैं कि इस दुविधा से कैसे निपटा जाए।उत्तराखंड बोर्ड परीक्षाएं 28 मार्च से शुरू हो रही हैं। बोर्ड परीक्षा की तैयारी में टैब मददगार हो, इस मंशा से प्रदेश सरकार की पहल पर 10वीं व 12वीं के छात्र-छात्राओं को मोबाइल टैबलेट दिए जाने थे। धनराशि छात्र-छात्राओं के बैंक खाते में जानी थी। विद्यार्थियों को टैब खरीदने के बाद सीरियल नंबर के साथ बिल स्कूल को देना था।कहा गया कि तीन जीबी रैम, 32 जीबी स्टोरेज क्षमता से कम व तय ब्रांड से दूसरे टैब स्वीकार नहीं होंगे। गुणवत्ता का ध्यान रखने के लिए बीईओ को नोडल बनाया गया।

शिक्षक व बीईओ को टैब खरीदने में मदद करनी थी। ढाई माह बाद करीब 20 से 25 प्रतिशत विद्यार्थियों ने ही टैब खरीदे हैं। अधिकारियों के पूछने पर बच्चे बाजार में टैब न मिलने, अभिभावक बैंक खाने से धनराशि न निकालने देने जैसे कुछ अन्य तर्क दे रहे हैं। ऐसे में यह धनराशि विभाग के लिए मुसीबत बन गई है।नैनीताल जिले के 189 सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले 10वीं के 7645 व 12वीं के 6214 विद्यार्थियों को धनराशि दी जानी थी। कुल 13859 बच्चे चयनित हैं। एक जनवरी को तत्कालीन सीईओ की मौजूदगी में मेयर डा. जोगेंद्र रौतेला ने जीजीआइसी हल्द्वानी में 10 छात्राओं को टैबलेट देकर इसकी शुरुआत की थी।टैब में कक्षा के अनुसार केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) का पाठ्यक्रम उपलब्ध कराया जाना है। जिसमें उपलब्ध आडियो, वीडियो सामग्री पढ़ाई में मददगार होती। इससे विद्यार्थी आनलाइन भी शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। समय का भी सदुपयोग होता।

बैंक खातों में भी शतप्रतिशत राशि नहीं गई है। स्कूलों ने बैंक का ब्योरा देते समय शून्य व ओ में भेद नहीं किया। आइएफएस कोड में जहां जीरो भरना था वहां अंग्रेजी लैटर का ओ भर दिया। कई जगह ओ के स्थान पर शून्य दर्शाया गया है। अधिकारी बाबू की ओर से गलत ब्योरा भरे जाने की बात कह रहे। इस गलती से धनराशि बैंक खातों में जाने के बजाय वापस आ गई। ऐसे मामलों में बैंकों को संशोधित पत्रावली भेजी गई हैं।मुख्य शिक्षाधिकारी केएस रावत का कहना है कि अधिकतर स्कूलों में 20 से 25 प्रतिशत बच्चों ने ही टैब खरीदे हैं। आइएसएफ कोड में गड़बड़ी से जहां धनराशि वापस आई थी, वहां नए सिरे से धनराशि भेजी गई है। बच्चे टैब खरीदें, इसे सुनिश्चित कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।

 

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