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अब दून की प्रमुख सड़कों पर स्पीड ब्रेकर नहीं बनाए जाएंगे और मौजूदा स्पीड ब्रेकरों को तोड़ा जाएगा

अब दून की प्रमुख सड़कों पर स्पीड ब्रेकर नहीं बनाए जाएंगे और मौजूदा स्पीड ब्रेकरों को तोड़ा जाएगा

 दून में बने तमाम बेढंगे स्पीड ब्रेकर रफ्तार पर कितना ब्रेक लगा रहे हैं, इसका पता नहीं है, मगर इतना जरूर है कि यह जनता के दर्द की वजह बनते जा रहे हैं। इनके चलते कई दफा हादसे भी हो जाते हैं। हालांकि, अच्छी बात यह है कि अब दून की प्रमुख सड़कों पर स्पीड ब्रेकर नहीं बनाए जाएंगे और मौजूदा स्पीड ब्रेकरों को तोड़ा जाएगा। शनिवार से इस पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है और पहले दिन राष्ट्रीय राजमार्ग (हरिद्वार-देहरादून रोड के विभिन्न भाग) के स्पीड ब्रेकर उखाड़ने का काम शुरू किया गया।उत्तराखंड के मुख्य सचिव डा. एसएस संधू भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) के प्रमुख रह चुके हैं। इस पद पर रहते हुए उन्होंने सड़क सुविधा के मानकों को बारीकी से समझा और उनका अनुपालन भी करवाया।

उत्तराखंड में प्रशासनिक मुखिया का दायित्व संभालने के बाद उनका पिछला अनुभव यहां भी काम आते दिख रहा है। उन्होंने बेहद कम समय में ही समझ लिया कि देहरादून में स्पीड ब्रेकर के नाम पर जनता किस तरह प्रताडि़त हो रही है, क्योंकि एकल प्रकृति के हंप व बंप स्पीड ब्रेकरों पर प्रतिबंध होने के बाद भी यहां इनकी भरमार है। इसके अलावा राजमार्गों पर सुरक्षा के नाम पर जो रंबल स्ट्रिप्स स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं, वह भी इंडियन रोड कांग्रेस के मानकों के विपरीत हैं।लोनिवि के विभागाध्यक्ष व प्रमुख अभियंता हरिओम शर्मा के मुताबिक देहरादून में राष्ट्रीय राजमार्ग से लेकर शहर की अन्य प्रमुख सड़कों पर किसी भी तरह के स्पीड ब्रेकर नहीं बनाए जाएंगे। कालोनियों में जरूर रंबल स्ट्रिप्स बनाने की छूट दी जाएगी और इसके साथ भीतरी क्षेत्रों में बने हंप व बंप स्पीड ब्रेकर हटाए जाएंगे।

जोगीवाला, रिस्पना पुल, मोथरोवाला चौक, सरस्वती विहार चौक, कारगी चौक आदि।

देहरादून-पांवटा साहिब रोड

जीएमएस रोड, बल्लीवाला फ्लाईओवर।दून की तमाम कालोनियों में हंप व बंप जैसे जानलेवा स्पीड ब्रेकरों की भरमार है। कई ब्रेकर तो आधे से लेकर एक फीट की ऊंचाई तक भी बने हैं। इनके चलते कई दफा दुपहिया वाहन रपट जाते हैं और कारों का निचला हिस्सा इससे टकरा जाता है। खास बात यह है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों के दबाव में इस तरह के अटपटे ब्रेकर बना दिए जाते हैं और लोनिवि व अन्य अधिकारी स्वयं ही नियमों का गला घोंट देते हैं।

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