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राज्य बनने के बाद नैनीताल विधानसभा सीट पर पहली महिला विधायक निर्वाचित हुई थीं सरिता आर्य

राज्य बनने के बाद नैनीताल विधानसभा सीट पर पहली महिला विधायक निर्वाचित हुई थीं सरिता आर्य

राज्य बनने के बाद नैनीताल विधानसभा सीट पर पहली महिला विधायक निर्वाचित हुई थीं सरिता आर्य। 2012 में कांग्रेस इस रिजर्व सीट पर सरिता को उम्मीदवार घोषित करते हुए चुनावी मैदान में उतरी थी। उसके बाद 2017 के चुनाव में भी कांग्रेस ने सरिता पर ही दांव खेला, लेकिन तब उन्हें यहां हार का सामना करना पड़ा। अब 2022 के चुनाव के लिए सरिता मशक्कत में जुटी थी, मगर कांग्रेस से टिकट की उम्मीद न होने के चलते उन्होंने पाला बदल भाजपा ज्वाइन कर लिया। उम्मीद यही है कि इस बार का चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़ें।

उत्तराखंड बनने के बाद 2002 में हुए पहले आम चुनाव में नैनीताल सीट पर यूकेडी के नारायण सिंह जंतवाल को विजय मिली थी। उसके बाद 2007 के चुनाव में भाजपा के खड़क सिंह वोहरा पर यहां के मतदाताओं ने भरोसा जताया और उन्हें विधानसभा भेजा। 2012 में हुए तीसरे आम चुनाव में सरिता आर्य पूरे दमखम के साथ कांग्रेस के टिकट से मैदान में उतरीं तो जनता ने उन पर विश्वास जताते हुए इस सीट के मुद्दों को देहरादून तक उठाने का जिम्मा उन्हें सौंपा। 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से सरिता आर्य और भाजपा से संजीव आर्य मैदान में उतरे। संजीव की जीत के बाद सरिता को तब जनादेश ने निराश किया था।

इस बार संजीव वापस कांग्रेस में आए तो पांच साल से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में जुटी सरिता की बेचैनी बढ़ गई। अब भाजपा से टिकट की आस के सा उन्होंने भी पाला बदल लिया है। नैनीताल नगर निकाय के चुनाव में जीत के बाद से लगातार राजनीति में सक्रिय सरिता को 2009 में आल इंडिया वूमन कांफ्रेंस का जिलाध्यक्ष बनाया गया था। 2015 में उन्हें महिला कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष मनोनीत किया गया। अब दलबदल के बाद यदि भाजपा उन्हें टिकट देती है तो वह उसी कांग्रेस को सीधी टक्कर देंगी, जिसे उन्होंने छोड़ा है। इस राजनीतिक घमासान के बीच नैनीताल सीट पर मुकाबला काफी रोमांचक होने वाला है।

 

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