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आरएसएस समापन पर सर संघचालक मोहन भागवत ने प्रदेश भर से भर से पहुंचे प्रचारकों का परिचय लिया

आरएसएस समापन पर सर संघचालक मोहन भागवत ने प्रदेश भर से भर से पहुंचे प्रचारकों का परिचय लिया

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की तीन दिवसीय बैठक के समापन पर सर संघचालक मोहन भागवत ने प्रदेश भर से पहुंचे प्रचारकों का परिचय लिया। इसके साथ ही उन्होंने व्यवस्थाओं में लगे स्वयंसेवकों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि देश में विपक्ष के बजाय प्रतिपक्ष की राजनीति होनी चाहिए। इसका मतलब यह है कि विपक्ष की राजनीति सिर्फ विरोध की है। जबकि प्रतिपक्ष की राजनीति सहमति व असहमति पर आधारित है।आम्रपाली संस्थान लामाचौड़ में आरएसएस की तीन दिवसीय प्रांत स्तर की बैठक सोमवार को दो सत्रों में आयोजित हुई। दोनों सत्रों में प्रदेश भर से पहुंचे करीब 100 प्रचारक मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने सभी प्रचारकों का परिचय लिया। साथ ही कई विषयों पर चर्चा की। शाम के समय उन्होंने तीन दिवसीय आयोजन की व्यवस्थाओं में लगे स्वयंसेवकों का परिचय लिया। इस दौरान स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए सर संघचालक ने कहा कि व्यवस्था एकदम शानदार हो, तब भी समीक्षा करनी चाहिए।

एक स्वयंसेवक का सवाल अध्यापक कैसे नई पीढ़ी को पढ़ाएं? इसके जवाब में भागवत ने कहा, एक अध्यापक को बच्चे की रुचि के अनुसार शिक्षा देनी चाहिए। उस बच्चे के लिए हमें वैसा माडल तैयार करना चाहिए। किसी बच्चे को दिक्कत है तो शिक्षक को समाधान करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि संस्कारों की शिक्षा देना शिक्षक का दायित्व है। एक और स्वयंसेवक के प्रश्न के जवाब में भागवत ने कहा कि देश में विपक्ष नहीं प्रतिपक्ष की राजनीति होनी चाहिए।एक और सवाल के जवाब में भागवत ने कहा कि 2024 तक के संघ की योजना कार्य निश्चित कर दिए गए हैं। 2025 में संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण हो जाएंगे। इस दौरान उन्होंने संघ की सात गतिविधियों पर जोर दिया। इसमें धर्म जागरण, परिवार प्रबोधन, सामाजिक समरसता, सामाजिक सद्भाव, गोसंवर्धन, ग्राम विकास, जल व पर्यावरण संरक्षण शामिल है। वहीं, तीन दिवसीय प्रवास के बाद सर संघचालक रात को रानीखेत एक्सप्रेस से दिल्ली के लिए रवाना हो गए।

 

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