ताजा खबरें >- :
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में प्राध्यापकों की भर्ती को लेकर एक नया विवाद छिड़ा

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में प्राध्यापकों की भर्ती को लेकर एक नया विवाद छिड़ा

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में प्राध्यापकों की भर्ती को लेकर एक नया विवाद छिड़ गया है। इस बार मामला आवेदन में समवर्गी विषय की योग्यता को शामिल करने व अधिमानी अंक दिए जाने का है। संविदा पर कार्यरत शिक्षकों के प्रत्यावेदन पर विवि ने इस मामले में एक समिति का गठन किया है। समिति की रिपोर्ट कार्य परिषद की आगामी बैठक में रखी जाएगी, जबकि विज्ञप्ति में साफ लिखा गया था कि भर्ती से संबंधित कोई भी पत्र व्यवहार स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे में इसकी खिलाफत शुरू हो गई है।केंद्रीय भारतीय चिकित्सा परिषद के नियमों में यह स्पष्ट है कि प्राध्यापक के पद पर उपलब्ध अभ्यर्थी के नहीं मिलने पर ही समवर्गी विषय को शामिल किया जा सकता है। विवि में इससे पहले हुई भर्ती में ऐसे उम्मीदवारों को अयोग्य करार दिया जा चुका है। इस दफा जो विज्ञप्ति जारी की गई उसके बिंदु संख्या 13 में साफ कहा गया था कि कोई भी आवेदनकर्ता विज्ञापन से संबंधित कोई प्रत्यावेदन नहीं करेगा। इसके बावजूद उक्त प्रत्यावेदनों पर समिति गठित करने पर सवाल उठ रहे हैं।

अधिमानी अंक को लेकर भी विरोध है। कहा जा रहा है कि यदि संविदा पर कार्यरत शिक्षकों को अधिमानी अंक दिए जाते हैं, तो यही व्यवस्था स्थायी प्राध्यापकों के लिए भी की जाए। विवि प्रशासन ने उक्त प्रकरण में जो समिति गठित की है, उसे लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इसमें संस्कृत के प्राध्यापक व परीक्षा नियंत्रक को शामिल करना किसी के गले नहीं उतर रहा। बताया गया कि परीक्षा नियंत्रक चिकित्सा शिक्षा संवर्ग के भी नहीं हैं।विवि के कुलसचिव प्रो. उत्तम शर्मा का कहना है कि संविदा शिक्षक करीब आठ-दस साल से सेवा दे रहे हैं। उनकी तैनाती जिस विषय में की गई थी, योग्यता उसके समवर्गी विषय में है। जिसे सीसीआइएम ने भी मान्यता दी है। स्थायी भर्ती में उक्त समवर्गी विषयों को शामिल करने को लेकर राय ली जा रही है। इसी के लिए समिति बनाई है। अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

Related Posts