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पुलिस स्थानांतरण नियमावली के तहत एक बार फिर कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर रैंक के कार्मिकों के तबादलों को लेकर विभाग में कसरत शुरू

पुलिस स्थानांतरण नियमावली के तहत एक बार फिर कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर रैंक के कार्मिकों के तबादलों को लेकर विभाग में कसरत शुरू

पुलिस स्थानांतरण नियमावली के तहत एक बार फिर कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर रैंक के कार्मिकों के तबादलों को लेकर विभाग में कसरत शुरू हो गई है।31 मार्च तक मैदानी व पर्वतीय जिलों में सेवाएं पूरी करने वाले कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल, दारोगा और इंस्पेक्टर के तबादले किए जाने हैं। इसको लेकर पुलिस उपमहानिरीक्षक गढ़वाल रेंज करन सिंह नगन्याल ने एसएसपी देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, टिहरी, चमोली, उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग को पत्र भेजकर एक सप्ताह में सूची भेजने के निर्देश जारी किए हैं।

डीआइजी के आदेशानुसार, पर्वतीय जिलों में ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मी यदि किसी कारण मैदानी जिलों में नहीं आना चाहते तो उन्हें प्रार्थना पत्र देकर मैदानी जिलों में न आने का कारण बताना होगा। इसके अलावा मैदानी व पर्वतीय जिलों में तैनाती का निर्धारित समय पूर्ण करने वाले पुलिसकर्मियों की इच्छानुसार तीन विकल्प मांगने के आदेश दिए गए हैं, जिसमें से एक विकल्प पर्वतीय जिले का होना अनिवार्य है।स्थानांतरण नियमावली के अनुसार यदि कांस्टेबल व हेड कांस्टेबल ने 16 साल सेवा मैदान में पूरी कर ली हो उन्हें पहाड़ी जिला पौड़ी, टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली व उत्तरकाशी भेजा जाएगा। इसी तरह आठ साल पहाड़ में सेवा करने वालों को मैदानी जिला देहरादून व हरिद्वार भेजा जाना है। इसी तरह दारोगा व इंस्पेक्टर रैंक में चार साल पहाड़ी जिले में नौकरी करने वाले कार्मिक को मैदान व आठ साल मैदान में ड्यूटी करने वाले को पर्वतीय जिलों में भेजा जाएगा।

स्थानांतरण को लेकर पुलिसकर्मियों ने दौड़भाग करनी शुरू कर दी है। कई पुलिसकर्मी स्थानांतरण रुकवाने के लिए जद्दोजहद में जुट गए हैं। 2021 में स्थानांतरण को लेकर खूब खींचतान हुई थी। कुछ दारोगा व इंस्पेक्टर मुख्यमंत्री के दरबार तक पहुंच गए। शासन की ओर से कोरोना संक्रमण की बात कहते हुए पुलिसकर्मियों के ट्रांसफर निरस्तीकरण के विशेष आदेश जारी किए गए। पुलिस विभाग की सिफारिश के बाद स्थानांतरण किए गए।स्थानांतरण को लेकर पुलिस विभाग को काफी मंथन करना पड़ता है। पर्वतीय मैदानी जिलों में संतुलन बैठाना विभाग के लिए मुश्किल होता है। मैदानी जिले देहरादून व हरिद्वार में जितनी फोर्स है, उतनी पर्वतीय पांच जिलों में हैं। पर्वतीय जिलों में तैनात पुलिसकर्मी मैदान उतरने को तैयार नहीं होते, ऐसे में संतुलन गड़बड़ा जाता है।दो दिन पूर्व ही सातों जिलों के प्रभारियों को पत्र भेजे हैं। ऐसे इंस्पेक्टर, दारोगा, हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल जिन्होंने पर्वतीय जिलों व मैदानी जिलों में स्थानांतरण नियमावली के तहत सेवा पूरी कर ली है, उनकी सूची एक सप्ताह के मांगी गई है। दो-चार दिनों में रिपोर्ट आ जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार स्थानांतरण किए जाएंगे।

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