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हिमालयी बुग्यालों  के बीच बरनाली में पहाड़ी घी बनाने की योजना

हिमालयी बुग्यालों के बीच बरनाली में पहाड़ी घी बनाने की योजना

नेशनल कोऑपरेटिव डेयरी कारपोरेशन ( एनसीडीसी ) के सहयोग से डेयरी विभाग उत्तराखंड बरनाली में गोर्थ सेंटर बनाया है। हिमालयी बुग्याल में चरने वाली गायों का दूध 150 लीटर इकट्ठा होकर बनाल में लाया जा रहा है। इस दूध को 250 लीटर बढ़ाने की योजना है इस दूध से घी बनाया जाएगा। ग्रामीण किसानों को राज्य में कुल 20 हज़ार गाय दी जा रही हैं। अब तक 25 सौ गाय दी गई है।

जनपद उत्तरकाशी के मोरी ब्लॉक के आराकोट क्षेत्र के निकट बरनाली, चिंवा, भलावट क्षेत्र मैं दूध की अच्छी संभावनाएं देखी गई है। एनसीडीसी व राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना की मदद से उत्तराखंड डेयरी विभाग ने प्राथमिक रूप से बनाल में एक दुग्ध समिति का गठन किया है वह समिति एक किराए के मकान में प्रतिदिन 150 लीटर दूध एकत्र करती है। अभी दूध का क्रीम निकाला जा रहा है। 250 लीटर दूध होने पर हर दिन 10 से 15 किलो पहाड़ी घी निकाले जाने की योजना पर डेयरी विभाग काम कर रहा है।

ग्रामीण किसानों को डेयरी विभाग 20 हज़ार गाय संपूर्ण उत्तराखंड राज्य में देने जा रहा है। जिसमें 2500 गाय डेयरी विभाग दे चुका है। यह गाय ग्रामीण किसानों को 10% अनुदान, 25% सब्सिडी और 65 परसेंट एनसीडीसी के लोन के तहत दी जा रही हैं ।

उत्तराखंड राज्य के सहकारिता विभाग के कैबिनेट मंत्री डॉ धन सिंह रावत किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए जमीन पर काम कर रहे हैं। डॉ रावत के नोडल मिनिस्ट्री के नीचे आधा दर्जन विभाग किसानों की आय बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं। डॉ रावत कहते हैं कि, दूध, घी, मक्खन की जरूरत सभी को होती है। इसकी मात्रा बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है। ग्रामीणों को एनसीडीसी की मदद से गाय दी जा रही है ताकि वह दुग्ध सहकारी समिति में दूध बेच सकें। डॉ रावत बताते हैं कि ग्रामीणों को गाय एनसीडीसी के माध्यम से दी जा रही है इसमें ग्रामीणों को पैसा देना नहीं होता है उनकी सिर्फ श्रम शक्ति है मकसद है दुधारू गायों से वह अपनी आमदनी दोगुनी करें।

उत्तराखंड में दूध उत्पादन में 25 हजार लीटर प्रतिदिन की बढ़ोतरी हुई है। स्वरोजगार और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से शुरू की गई राज्य समेकित सहकारी विकास योजना रंग लाई है। प्रदेश में प्रतिदिन 2.15 लाख लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है।

कोविड महामारी में लॉकडाउन के चलते उत्तराखंड लौटे प्रवासियों को स्वरोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना और गंगा गाय महिला डेयरी योजना शुरू की थी।

इन योजनाओं के माध्यम से सरकार की ओर से पांच और तीन दुधारू गाय खरीदने पर अनुदान किया है। जिससे कई लोगों ने दुग्ध उत्पादन को रोजगार के रूप में अपनाया। पिछले साल तक प्रदेश में प्रतिदिन 1.90 लाख लीटर दूध उत्पादन होता था जो बढ़ कर 2.15 लाख लीटर पहुंच गया है।

दुग्ध उत्पादन में रोजगार की काफी संभावना है। सरकार की ओर से चलाई गई योजना से प्रदेश में उत्पादन बढ़ा है। राज्य समेकित सहकारी विकास योजना के तहत माध्यम से गत वर्ष 1300 दुधारू पशु लाभार्थियों को दिए गए। सहकारी दुग्ध समितियों के माध्यम से किसानों से दूध एकत्रित किया जाता है।

जिसके बाद आंचल के नाम से दूध की बिक्री की जा रही है। किसानों को दूध की गुणवत्ता पर अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।

सचिव सहकारिता, डेयरी , राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना के मुख्य परियोजना निदेशक डॉ बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने बताया कि,
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम द्वारा वित्त पोषित “केन्द्रीय क्षेत्रक एकीकृत कृषि सहकारिता परियोजना” राज्य में संचालित “राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना अन्तर्गत “राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम द्वारा केन्द्रीय क्षेत्रक एकीकृत कृषि सहकारिता परियोजना स्वीकृत की गयी है। परियोजना के डेयरी क्षेत्र के लिये रू 444.62 करोड़ की योजना स्वीकृत है। स्वीकृत योजना अन्तर्गत विभिन्न मद यथा व्यवसायिक डेरी फार्म, ब्राडिंग एवं मार्केटिंग, दुग्ध सहकारी समितियों हेतु तकनीकी निवेश सुविधाये आदि मदों हेतु ऋण एवं सहायता उपलब्ध कराया जा रहा है।

सचिव डॉ बीवीआरसी पुरुषोत्तम कहते हैं कि,
प्रदेश में स्थापित दुग्ध सहकारी समितियों के दुग्ध उत्पादक सदस्यों तथा स्वरोजगार करने के इच्छुक निवासियों के मध्य व्यवसायिक डेरी फार्मिंग को बढ़ावा देने के उददेश्य से 03 एवं 05 दुधारू पशु इकाई स्थापना हेतु ऋण एवं अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। योजना अन्तर्गत स्थापित की जाने वाली दुधारू पशु इकाई के लिये क्रय किये जाने वाले दुधारू पशु प्रदेश के बाहर से कय किया जाना सुनिश्चित किया गया है, जिसका अनुश्रवण मोबाइल ऐप के माध्यम से सुनिश्चित किया गया है। प्रदेश के बाहर से दुधारू पशु कय किये जाने से प्रदेश के दुधारू पशुधन में वृद्धि किया जाना सुनिश्चित हो सका है तथा वर्तमान में गत वर्ष के सापेक्ष दुग्ध सहकारी समितियों के माध्यम से दुग्ध उपार्जन में लगभग 25000 ली० प्रतिदिन की वृद्धि औसत रूप से प्राप्त हो रही है। योजनान्तर्गत प्रदेश के 5266 लाभार्थियों को लगभग 20,000 दुधारू पशु कय हेतु ऋण एवं राज सहायता उपलब्ध कराये जाने का लक्ष्य निर्धारित है।

योजनान्तर्गत निर्धारित मद “ब्राडिंग एवं मार्केटिंग अन्तर्गत प्रदेश के दुग्ध सहकारी ब्राण्ड “”आंचल’ की ब्राण्डिग एवं मार्केटिंग अन्तर्गत आंचल दूध एवं दुग्ध पदार्थों का प्रचार-प्रसार विभिन्न सोशल मीडिया के माध्यम से किया जा रहा है। “ब्राडिंग एवं मार्केटिंग” मद अन्तर्गत नये मूल्य वर्धित

दुग्ध पदार्थों यथा पहाड़ी घी, आर्गेनिक घी बढ़ी घी तथा छुर्पी (हार्ड चीज) आदि का निर्माण एवं देश के प्रमुख शहरों में मार्केटिंग की जा रही है जिसके लिये राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के व्यवसायियों से अनुबन्ध किया गया है। मूल्यवर्धित दुग्ध पदार्थों के निर्माण एवं प्रामियम दरों पर विकय किये जाने से प्राप्त अतिरिक्त लाभ सम्बन्धित दुग्ध उत्पादकों को उनके द्वारा उपलब्ध कराये गये दूध पर प्रति ली० रू0 03 से 07 तक हस्तान्तरित किया जा रहा है। ब्राडिंग एवं मार्केटिंग मद अन्तर्गत शहरी क्षेत्रों में स्वरोजगार उपलब्ध कराये जाने के उददेश्य से “आंचल दूध बिकी केन्द्र” की स्थापना की जा रही है। केन्द्र के माध्यम से आंचल दूध एवं दुग्ध पदार्थों के अतिरिक्त प्रदेश के ग्राम्य विकास के ब्राण्ड “हिलांश” के माध्यम से उत्पादित एवं विपणन किये जा रहे विभिन्न उत्पादों की बिक्री भी की जा रही है। योजनान्तर्गत 500 आंचल दुग्ध बिक्री केन्द्र स्थापित किये जाने का लक्ष्य निर्धारित है।

योजना के “दुग्ध सहकारी समितियों हेतु तकनीकी निवेश सुविधाये” मद अन्तर्गत दुग्ध मार्गों में क्लस्टर वार “दुग्ध उत्पादक सेवा केन्द्र की स्थापना की जा रही है। सेवा केन्द्र के माध्यम से विभिन्न तकनीकी सुविधायें यथा संतुलित पशुआहार, कॉम्पैक्ट फीड ब्लॉक, साईलेज, सामान्य पशु औषधी की उपलब्धता किसान के द्वार तक उपलब्ध करायी जा रही है।

डेयरी के परियोजना निदेशक श्री जयदीप अरोड़ा ने बताया कि डेयरी विभाग एनसीडीसी की मदद से बुग्यालों पर ज्यादा फोकस कर रहा है वैज्ञानिक रूप से बुग्यालों में चरने वाली गायों से निकाले जाने वाला दूध, मक्खन, घी शुद्ध होता है इससे बेहतरीन दुनिया में कुछ नहीं है। श्री अरोड़ा बताते हैं कि विभाग दुग्ध समितियां बना रहा है और दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए प्रयास हो रहे हैं। बनाल से 15 किलो पहाड़ी घी प्रति दिन बनाने की योजना पर काम चल रहा है। बरनाल उत्तरकाशी जनपद का सीमांत क्षेत्र है यह बेल्ट सेबों की मशहूर बेल्ट कहलाई जाती है यहां बुग्याल हैं प्रकृति है हरियाली है यहाँ से हिमाचल कुछ ही दूरी पर है।

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