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उत्तराखंड की सभी जेलों में आईजी जेल ने बंदियों के लिए पीसीओ लगाने के दिए आदेश

उत्तराखंड की सभी जेलों में आईजी जेल ने बंदियों के लिए पीसीओ लगाने के दिए आदेश

प्रदेश की जेलों के कैदियों को जल्द ही हाईटेक पीसीओ बूथ की सुविधा मिलेगी। इस बूथ से कैदी अपने वकील व परिजनों से सिर्फ दो नंबरों पर बात कर सकेंगे। प्रदेश की सभी जेलों में पीसीओ बूथ लगाने के लिए आईजी जेल की ओर से आदेश जारी किए गए हैं। जेल आईजी की ओर से सभी जेलों में शासनादेश भेजकर नए साल में यह सुविधा शुरू करने के आदेश दिए गए हैं। अब नए साल पर बंदियों को यह तोहफा मिल सकेगा।

प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों को नए साल पर पीसीओ (पब्लिक कॉल ऑफिस) का तोहफा मिलने जा रहा है। इसके लिए शासन स्तर पर तेजी से कवायद शुरू कर दी गई है। पीसीओ बूथ लगने के बाद जेलों में बंद बंदियों को अपने परिजनों से बिना किसी रुकावट के बात करने की इच्छा नए साल में पूरी होने वाली है।

दरअसल, आईजी जेल डॉ. पीवीके प्रसाद की ओर से एक सप्ताह पूर्व सूबे की सभी जेलों के जेलरों को पत्र भेजकर नए साल में अपनी जेलों में पीसीओ लगाने के आदेश जारी किए गए हैं।

अब नए साल में बंदी अपने परिजनों से बात करना शुरू कर देंगे। इसके लिए सूबे की सभी जेलों की ओर से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। जेलों में पीसीओ की सुविधा मिलने के बाद बंदियों के परिजन बिना कैदी के मिले भी उसका सुखदुख का हाल जान सकेंगे।

कैदीयों के फोन पे बात करने के नियम

कारागार में लगाए जाने वाले फोन पर बात करने के लिए अलग से एक बूथ बनाया जाएगा। इसके अलावा बंदी को जेल में अपने दो नंबरों का रजिस्ट्रेशन कराना होगा। ये दो नंबर जेलर के पास रहेंगे। इन्हीं दो नंबरों पर बंदी बात कर पाएगा। दोनों नंबरों की ये शर्त होंगी कि ये पोस्टपेड होने चाहिए। जेल के फोन से प्रीपेड नंबरों पर बात नहीं हो पाएगी। बंदी दिन में दो बार ही इन दो नंबरों पर परिजनों या अपने वकील से बात कर सकता है।

सूबे की सभी जेलों में लगाए जाने वाले फोन से बंदी किससे और क्या बात कर रहा है, यह सबकुछ रिकार्ड होगा। अधिकारियों के मुताबिक फोन में बंदी द्वारा की जानी वाले सभी बातें रिकार्ड होती रहेंगी। किसी भी तरह की गड़बड़ होने पर बंदी की बातें रिकार्ड के माध्यम से पुलिस को सुनवा दी जाएंगी। अगर कोई गड़बड़ी मिलेगी तो बंदी और बात करने वाले शख्स के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

जेल अधिकारियों के मुताबिक, बंदियों के लिए पीसीओ की सुविधा बीएसएनल की ओर से दी जाएगी। कॉल करने का पूरा खर्च बंदी या उसके परिजनों को खुद ही उठाना होगा। इसके लिए बंदी जेल में अपनी मजदूरी से पैसा कटवा सकता है या फिर उसके परिजनों को कॉल के आधार पर एडवांस में जेल में यह रकम जमा करवानी होगी। इसके बाद ही बंदी पीसीओ का प्रयोग कर सकेगा।

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