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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने आरक्षित वन भूमि से अवैध तरीके से पेड़ काटने के मामले गंभीर रुख दिखाया

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने आरक्षित वन भूमि से अवैध तरीके से पेड़ काटने के मामले गंभीर रुख दिखाया

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने आरक्षित वन भूमि से अवैध तरीके से पेड़ काटने, बिना मंजूरी के सड़क बनाने तथा मलबा फेंकने के मामले गंभीर रुख दिखाया है। मामले में वन विभाग के अफसर-कर्मचारियों को महज चार्जशीट थमाकर दूसरे कार्यालय में अटैच करने व लोनिवि के अधिशासी अभियंता पर जुर्माना लगाने की कार्रवाई को दिखावटी करार दिया है। साथ ही इस मामले को वन अधिनियम का गंभीर उल्लंघन मानते हुए वन विभाग व लोनिवि के इंजीनियरों पर अपराधिक कार्रवाई करने तथा जुर्माने की राशि की वसूली करने के आदेश पारित किए हैं। मुख्य सचिव से तीन माह में इन आदेशों के अनुपालन से संबंधित एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट क्षेत्रान्तर्गत कोटिला-गेवाड़-सुरईखेत सड़क निर्माणाधीन है। इस सड़क के लिए वन अधिनियम के अंतर्गत 3.8 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि का हस्तांतरण किया गया। आरोप है कि चार सौ मीटर आरक्षित वन भूमि पर सड़क की स्वीकृति के सापेक्ष 630 मीटर सड़क काट दी गई। यहां 232 पेड़ अवैध तरीके से काटने के साथ ही आरक्षित वन भूमि पर ही डंपिंग जोन बना दिया। अल्मोड़ा निवासी जगदीश चंद्र पांडे ने पिछले साल इस मामले को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपना प्रत्यावेदन सक्षम अधिकारी को देने व विधि सम्मत कार्रवाई करने का निर्देश देकर याचिका निस्तारित कर दी। जब प्रत्यावेदन देने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई तो जगदीश ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की।

एनजीटी के निर्देश पर प्रमुख वन संरक्षक की अध्यक्षता में बनी कमेटी से जांच कर रिपोर्ट देने को कहा गया था। कमेटी में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य भी थे। 30 जुलाई को कमेटी ने रिपोर्ट देकर बताया कि आरक्षित वन क्षेत्र में 399 पेड़ काटे गए। निर्माण एजेंसी ने 630 मीटर सड़क काटी है, जबकि स्वीकृति चार सौ मीटर थी। कमेटी ने माना कि मलबा भी अवैध तरीके से आरक्षित वन भूमि पर फेंका गया है। 232 पेड़ अवैध तरीके से काटे हैं। कमेटी की संस्तुति पर लोनिवि के अधिशासी अभियंता रानीखेत पर 15,16,854 रूपये जुर्माना लगाया था। साथ ही तत्कालीन वन क्षेत्राधिकारी नवीन टम्टा, फोरेस्ट गार्ड दिनेश भट्ट व बीट कर्मचारी चंद्रशेखर त्रिपाठी के खिलाफ चार्जशीट फाइल कर दी। तीनों को वहां से हटाते हुए कार्यालयों में अटैच कर दिया। कमेटी ने लोनिवि के मुख्य अभियंता को पत्र भेजकर लोनिवि के तत्कालीन अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता व अवर अभियंता की जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई की संस्तुति भेजी थी। कमेटी ने यह रिपोर्ट एनजीटी में दाखिल की। पांच अगस्त को एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस आदर्श गोयल, न्यायिक सदस्य जस्टिस सुधीर अग्रवाल व जस्टिस बृजेश सेठी, विशेषज्ञ सदस्य डा. नागेंद्र नंदा की संयुक्त पीठ ने लोनिवि सचिव को इस मामले में आपराधिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मुख्य सचिव को लोनिवि के अभियंताओं, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों पर आपराधिक कार्रवाई करते हुए जुर्माने की राशि वसूलने को कहा है। इसके लिए तीन माह का वक्त दिया है। अगली सुनवाई 15 दिसंबर नियत की है।

इस मामले में एनजीटी ने टिप्पणी की कि उल्लंघन करने वालों के खिलाफ की कार्रवाई अपर्याप्त है। सख्त कार्रवाई करने में विफलता अराजकता को बढ़ावा देती है। ऐसा प्रतीत होता है कि कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया जबकि अपराध किया गया है। लोनिवि सचिव को निर्देश देते हैं कि की गई गई कार्रवाई की समीक्षा करें और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करें। राज्य पीसीबी व वन विभाग को उनकी ओर से की गई अपर्याप्त कार्रवाई की समीक्षा करने की आवश्यकता है। प्रदूषक भुगतान सिद्धांत पर मुआवजे की वसूली और संबंधित वन क्षेत्र की बहाली हो सकती है। विभाग एक माह के भीतर मुख्य सचिव को कार्रवाई की रिपोर्ट दें और मुख्य सचिव तीन माह के भीतर मामले में कार्रवाई की रिपोर्ट दाखिल करें।

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