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पूर्व मंत्री मदन कौशिक के सामने इस विधानसभा चुनाव में स्वयं को साबित करने के साथ ही पार्टी को पिछले प्रदर्शन से आगे ले जाने की बड़ी चुनौती

पूर्व मंत्री मदन कौशिक के सामने इस विधानसभा चुनाव में स्वयं को साबित करने के साथ ही पार्टी को पिछले प्रदर्शन से आगे ले जाने की बड़ी चुनौती

उत्तराखंड भाजपा में पिछले वर्ष मार्च में हुए नेतृत्व परिवर्तन के बाद पार्टी संगठन की कमान संभालने वाले पूर्व मंत्री मदन कौशिक के सामने इस विधानसभा चुनाव में स्वयं को साबित करने के साथ ही पार्टी को पिछले प्रदर्शन से आगे ले जाने की बड़ी चुनौती है। इसे देखते हुए कौशिक रात-दिन एक किए हुए हैं।

प्रदेश में भाजपा खासी बेहतर स्थिति में है। हमारा कार्यकर्त्ता उत्साहित है। हम देख रहे हैं कि जहां-जहां राष्ट्रीय नेताओं के कार्यक्रम हो रहे हैं, वहां कार्यकर्त्ता पूरी तरह से चार्ज हो चुका है। जिन सीटों को हमने शुरुआत में बी श्रेणी का माना था, आज वहां हम ए श्रेणी में पहुंच गए हैं। भाजपा बड़ी जीत की ओर बढ़ रही है। कितनी सीटें जीत रहे हैं, यह नहीं बता सकते, क्योंकि यह रणनीति का हिस्सा है। हरिद्वार संसदीय क्षेत्र में पिछले चुनाव में जितनी सीटें आई थीं, इस बार उससे अधिक ही आएंगी।

उपलब्धियों की लंबी फेहरिस्त है। महिला सशक्तीकरण के लिए घस्यारी योजना समेत कई योजनाएं, युवाओं को पांच करोड़ तक के काम, किसानों को ब्याजमुक्त ऋण, ढांचागत विकास, रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास, कोविड से बचाव को तेजी से टीकाकरण, भाषा एवं संस्कृति का विकास, सड़कों का विस्तार जैसी उपलब्धियां सब देख रहे हैं। केंद्र के सहयोग से चारधाम आल वेदर रोड, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, भारतमाला परियोजना, संचार सुविधाओं का विस्तार सहित एक लाख करोड़ से अधिक की योजनाएं राज्य में संचालित हो रही हैं। इनमें कई पूर्ण हो चुकी हैं और शेष पर तेज गति से कार्य चल रहा है। हमने हर क्षेत्र, हर वर्ग को ध्यान में रखकर विकास किया है। अपने विकास के एजेंडे के साथ ही हम जनता के बीच जा रहे हैं। जनता भी समझती है कि राज्य का विकास कोई कर सकता है तो वह भाजपा है। विकास की यह रफ्तार कायम रहे, इसके लिए डबल इंजन जरूरी है। हमें पूरा भरोसा है कि राज्य के चहुंमुखी विकास के लिए जनता एक बार फिर से भाजपा पर भरोसा जताएगी।

मुख्यमंत्री कैसे बनेंगे, बहुमत तो भाजपा को मिलने जा रहा है। कांग्रेस का मुख्यमंत्री तो तब बनेगा, जब उनकी सरकार बनेगी। सरकार बनाना तो छोड़िए, तय है कि कांग्रेस 2017 से भी नीचे जा रही है। हरीश रावत का जहां तक सवाल है, हमें तो लग रहा है कि रावत इस बार भी हारदा साबित होंगे।

चुनौती तो है ही संगठन का अध्यक्ष होने के साथ ही चुनाव भी लड़ने में। अध्यक्ष होने के नाते पूरे प्रदेश की जिम्मेदारी है। प्रदेश के हर हिस्से तक, सभी विधानसभा क्षेत्रों में पहुंचना भी जरूरी है कार्यकर्त्ताओं को प्रेरित करने के लिए। फिर भी पूरा प्रयास रहा कि अपने चुनाव क्षेत्र हरिद्वार में एक-एक मतदाता से संपर्क कर सकें।

कांग्रेस ने पूरे पांच साल विपक्ष की भूमिका का निर्वहन ठीक से नहीं किया। यही नहीं, जनता में विश्वास जगाने में कांग्रेस पूरी तरह विफल साबित हुई। अब चुनाव आते-आते कांग्रेस तुष्टीकरण पर उतर आई है। सीडीएस स्व जनरल बिपिन रावत को सड़क का गुंडा कहने वाली कांग्रेस असामयिक निधन के बाद राहुल गांधी की सभा में उनके बड़े-बड़े कटआउट लगाकर सैन्य बहुल उत्तराखंड की जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है। इसी कांग्रेस ने सर्जिकल स्ट्राइक पर भी सवाल उठाए थे। वर्षों से लंबित वन रैंक, वन पेंशन की मांग को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की भाजपा सरकार ने पूरा किया।

देवभूमि में मुस्लिम यूनिवर्सिटी स्थापित करने की बात किसने कही, कांग्रेस ने। जुमे की नमाज के लिए छुट्टी का आदेश किसने जारी किया था, हरीश रावत के नेतृत्व वाली पिछली कांग्रेस सरकार ने। अब बताइए, सांप्रदायिकता कौन फैला रहा है, भाजपा या कांग्रेस। हरीश रावत ने चुनौती दी थी कि जुमे की छुट्टी का भाजपा शासनादेश दिखाए तो वह राजनीति से संन्यास ले लेंगे। अब शासनादेश सामने आ गया तो हरीश रावत संन्यास क्यों नहीं ले रहे हैं। जनता को उन्हें इस बात का जवाब देना चाहिए।

बहुत सहयोग मिल रहा है। हरिद्वार के सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री निशंक सहित पार्टी के सभी सांसदों को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई है और सब आगे बढ़कर इसमें अपनी भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। इसके साथ ही सभी पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, त्रिवेंद्र सिंह रावत, तीरथ सिंह रावत अलग-अलग मोर्चों पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी का पूरा आशीर्वाद हमारे साथ है।

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