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आइआइटी में पढ़ने का सपना साहकार, 32 अंक पर भी खुुले हैं दाखिले

आइआइटी में पढ़ने का सपना साहकार, 32 अंक पर भी खुुले हैं दाखिले

आइआइटी के लिए जेईई-एडवांस अगर आपने भी एग्जाम दिया था और नंबर अच्छे नहीं आए हैं तो घबराए नहीं । आइआइटी में 32 अंक पर भी आपके दाखिले होंगे। जेईई-एडवांस में मात्र 8.75 प्रतिशत अंक लाने पर भी छात्रों को आइआइटी द्वारा संचालित एक साल के प्रिपेरेट्री कोर्स में प्रवेश लेने का मौका मिलेगा । कि इस कोर्स में प्रवेश लेने वाले छात्रों के पास एडवांस एग्जाम में भी अपीयर होने का एक एक्स्ट्रा चांस मिलता है। यह मौका एससी, एसटी व पीएच कैटेगिरी के छात्रों के लिए होता है।

देश भर के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी आइआइटी में प्रिपेरट्री कोर्स संचालित किया जाता है। इसमें प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थी को कोर्स पूरा करने पर द्वितीय वर्ष में डायरेक्ट एंट्री मिलती है। बलूनी क्लासेज के प्रबंध निदेशक विपिन बलूनी ने बताया कि गत वर्षों में एडवांस का लेवल काफी हाई रहा है और हर साल प्रवेश लेने का क्राइटेरिया भी बदला है। प्रिपेरेट्री कोर्स में प्रवेश दिया जाता है। प्रिपेटरी कोर्स का क्वाइलिफाइंग क्राइटीरिया 32 अंक का रखा गया है। प्रिपेरेट्री कोर्स उन सीटों के लिए है, जो रिक्त रह जाती हैं। ओबीसी की सीट खाली रहने पर सामान्य वर्ग को इन पर दाखिला दिया जाता है। लेकिन एससी, एसटी व दिव्यांग कोटे का अन्य श्रेणी से भरने का प्रावधान नहीं है। ऐसे में जिन छात्रों की जेईई-एडवास्ड में अच्छे स्कोर के साथ अच्छी ऑल इंडिया रैंक नहीं बनी है, वह निराश न हों। उनके लिए अन्य कॉलेजों में प्रवेश के भी विकल्प खुले हैं। आइआइटी, एनआइटी, ट्रिपलआइटी व जीएटीआइ के अलावा भी कई अच्छे इंजीनियरिंग संस्थान हैं। हर साल लाखों बच्चे बारहवीं के बाद इंजीनियरिंग के लिए फॉर्म भरते हैं। जिनमें जेईई-मेन के स्कोर पर दाखिला लिया जा सकता है। भले ही आज इंजीनियरिंग के क्षेत्र में जॉब कम हैं लेकिन फिर भी विज्ञान वर्ग से बारहवीं पास करने वाले बच्चों के लिए इंजीनियरिंग ही सबसे फेवरेट कोर्स है। जेईई-एडवांस्ड के कटऑफ में इस बार गिरावट दिखी है। इस साल अनारक्षित वर्ग के लिए कट-ऑफ 89.754 और ईडब्ल्यूएस और ओबीसी छात्रों के लिए यह क्रमश: 78.217 और 74.316 रहा है। बता दें, इस बार जेईई एडवांस्ड में 2,45,000 से अधिक परीक्षार्थी योग्य थे, लेकिन परीक्षा के लिए 1.65 लाख छात्रों ने ही रजिस्ट्रेशन किया। जिसका असर कटऑफ पर भी दिखा है।

जेईई में उम्मीद के अनुसार स्कोर न मिलने पर सबसे पहले आपके पास विकल्प है कि आप वापस इसकी तैयारी करें। अगर समय, मौके खत्म हो जाने या और किसी अन्य वजह से नहीं कर पाते हैं तो अन्य तरीका ढूंढें। अविरल क्लासेज के निदेशक डीके मिश्रा के अनुसार जेईई-मेन के स्कोर व रैंक के आधार पर भी छात्र कई अच्छे इंजीनियरिंग संस्थानों में अलग से आवेदन कर सकते हैं। इनमें ट्रिपलआइटी हैदराबाद, डीटीयू दिल्ली, एनएसआइटी दिल्ली, ट्रिपल आइटी दिल्ली, धीरूभाई अंबानी, निरमा अहमदाबाद, जेपी नोएडा, थापर पटियाला, पीडीपीओ गाधीनगर, पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज चंडीगढ़, आइआइएससी बैंगलुरू, एआइटी पुणे, एलएनएमआइआइटी जयपुर जैसे इंजीनियरिंग संस्थान शामिल हैं। इनमें से कई संस्थानों में जेईई-मेन की काफी पीछे की रैंक के आधार पर भी प्रवेश संभव होता है। यानी छात्र अन्य इंजीनियरिंग संस्थानों में भी प्रवेश के विकल्प साथ लेकर चल सकता है। इसके अलावा आप किसी राज्य स्तरीय इंजीनियरिंग कॉलेज से पढ़ाई करते अच्छा कॅरियर बना सकते हैं और सरकारी या प्राइवेट नौकरी प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने ही आइआइटी प्रबंधन को निर्देश दिए थे कि आइआइटी की एक भी सीट खाली नहीं रहनी चाहिए। जिसके बाद कटऑफ कम कर दिया गया। वीआर क्लासेज के प्रबंध निदेशक वैभव राय के अनुसार इस साल आइआइटी ने कटऑफ कम रखा है। जिससे छात्रों को बड़ी रियायत मिली है। इसका एक कारण यह भी है कि जेईई एडवांस्ड के लिए क्वालिफाई करने वाले कई छात्रों ने परीक्षा ही नहीं दी। योग्य उम्मीदवारों में कई छात्र पहले ही बैकआउट कर गए। कम छात्रसंख्या का असर कटऑफ पर दिखा है।

 

आइआइटी ने जेईई एडवांस में क्वालिफाई करने के लिए पेपर-1 और पेपर-2 में 35 प्रतिशत अंकों का मानक तय किया हुआ है। वर्ष 2017 में 128 अंकों तक वाले छात्र क्वालिफाइड थे लेकिन आइआइटी ने इसे कम कर दिया था। इस वजह से भारी संख्या में छात्र आइआइटी काउंसिलिंग के लिए क्वालिफाई कर गए थे। पिछले साल आइआइटी प्रबंधन को जेईई एडवांस्ड का संशोधित रिजल्ट जारी करना पड़ा था। पहले सामान्य कट ऑफ 126 अंक रखा गया था। जिसे बाद में बदलकर 90 कर दिया गया। दरअसल जेईई एडवांस्ड में कुल सीटों की तुलना में बेहद कम छात्रों ने क्वालिफाइ किया था, जिसके चलते ये फैसला लिया गया। तत्कालीन केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर को मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा था।

 

 

 

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