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हाई कोर्ट ने चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या को बढ़ाए जाने को लेकर मामले की सुनवाई की

हाई कोर्ट ने चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या को बढ़ाए जाने को लेकर मामले की सुनवाई की

हाई कोर्ट ने चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या को बढ़ाए जाने को लेकर मामले की सुनवाई की। सोमवार को महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर व मुख्य स्थायी अधिवक्ता (सीएससी) चन्द्रशेखर रावत द्वारा मुख्य न्यायधीश की अध्यक्षता वाली खण्डपीठ में मामले की जल्द सुनवाई हेतु प्रार्थना की। कोर्ट ने उनके इस को सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई कल मंगलवार अक्टूबर के लिए नियत की है। सरकार ने इस मामले में कोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए निर्णय को संशोधन करने की मांग की है।महाधिवक्ता द्वारा सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि चारधाम यात्रा करने के लिए कोविड को देखते हुए कोर्ट ने पूर्व में श्रद्धालुओं की संख्या निर्धारित कर दी थी लेकिन वर्तमान समय मे प्रदेश में कोविड के केस ना के बराबर आ रहे है, इसलिए चारधाम यात्रा करने के लिए श्रद्धालुओं की निर्धारित संख्या के आदेश में संशोधन किया जाय।

महाधिवक्ता द्वारा यह भी कहा कि चारधाम यात्रा समाप्त होने में 40 दिन से कम का समय बचा है, इसलिए जितने भी श्रद्धालू आ रहे है, सबको दर्शन करने की अनुमति दी जाए। जो श्रद्धालु ऑन ललाइन दर्शन करने हेतु रजिस्ट्रेशन करा रहे है, वह नहीं आ रहे है जिसके कारण स्थानीय लोगों पर रोजीरोटी का खतरा उत्तपन्न हो रहा है। सरकार को कोर्ट ने पूर्व दिए गए दिशा निर्देशों का हर सम्भव प्रयास किया जा रहा।चारधाम यात्रा में सभी सुविधाओं को उपलब्ध करा दिया गया। सरकार की तरफ से यह भी कहा गया है कि चारधाम यात्रा करने के लिए श्रद्धालुओं की निर्धारित संख्या पर से रोक हटाई जाए या फिर श्रद्धालुओं की संख्या तीन से चार हजार प्रतिदिन की जाए। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएस चौहान व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने पूर्व में चारधाम में प्रतिदिन केदारनाथ धाम में 800, बद्रीनाथ धाम में 1000, गंगोत्री में 600, यमुनोत्री में कुल 400 श्रद्धालुओ को जाने की अनुमति दी थी।

 

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