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हाईकोर्ट हुआ सख्त; गुरुद्वारा ज्ञान गोदड़ी की स्थापना के मामले में दायर याचिका  सुनवाई पर

हाईकोर्ट हुआ सख्त; गुरुद्वारा ज्ञान गोदड़ी की स्थापना के मामले में दायर याचिका सुनवाई पर

हरिद्वार में गुरुद्वारा ज्ञान गोदड़ी की स्थापना के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व विभाग के निदेशक केंद्र उत्तराखंड एवं यूपी सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। उत्तराखंड सिख फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष गुरुदेव सिंह सहोता ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि सिखों के पहले गुरु गुरुनानक देव के हरिद्वार में पहली बार आने पर तत्कालीन लंढौरा नरेश ने अपनी हवेली में ज्ञान गोदड़ी का आयोजन किया था।

गुरुनानक के आगमन पर हरकी पैड़ी में गुरुद्वारा ज्ञान गोदड़ी के लिए जगह आवंटित की गई थी जो 1976 तक उसी स्थान पर थी। याचिका में कहा गया कि उस समय तत्कालीन सरकार ने हरकी पैड़ी के सौंदर्यीकरण के दौरान ज्ञान गोदड़ी को वहां से हटा दिया और ज्ञान गोदड़ी को पुन उसी स्थान पर स्थापित करने का आश्वासन दिया लेकिन इस ऐतिहासिक धरोहर और सिखों के पवित्र चिह्न को अभी तक वहां स्थापित नहीं किया जा सका।

याचिका में कहा गया कि 2001 में इस मामले की शिकायत राष्ट्रीय अल्प संख्यक आयोग से की गई। आयोग के निर्देश पर हरिद्वार के तत्कालीन जिलाधिकारी ने गुरुद्वारा ज्ञान गोदड़ी की स्थापना के लिए जगह का चयन कर शासन को भेजा। जांच में यह स्थान यूपी सरकार के अधिकार क्षेत्र में पाया गया।

इस मामले में आयोग से दोबारा शिकायत करने पर आयोग ने दोनों सरकारों के मुख्य सचिवों को गुरुद्वारा ज्ञान गोदड़ी के लिए भूमि आवंटित करने को कहा लेकिन इस प्रकरण में अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।

याचिकाकर्ता ने इस ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने और इसे विकसित करने की मांग की है। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने भारतीय पुरातत्व विभाग के निदेशक, केंद्र, उत्तराखंड और यूपी सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

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